मौलाना साद की जमातियों से अपील – ‘कोरोना से ठीक हो चुके ब्‍ल’ड प्‍लाज्‍मा करें दान’

निज़ामुद्दीन मरकज मामले के सामने आने के बाद चौतरफा आलोचना में घिरे तब्लीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद ने कोरोना से संक्रमित इलाज के लिए जमातियों से अपना प्लाज्मा दान करने की अपील की है। मंगलवार को इस बात उन्होने एक पत्र जारी किया।

उन्होने कहा कि वह और तबलीगी जमात के कुछ अन्य सदस्यों ने खुद को पृथकवास में रखा हुआ है। कंधालवी ने कहा कि खुद को पृथकवास में रखे ज्यादातर सदस्यों में कोराना वायरस की जांच में कोई संक्रमण नहीं पाया गया। जो संक्रमित पाए गए हैं उनमें से ज्यादातर का इलाज चल रहा है और अब वे स्वस्थ हो चुके हैं। मैं और कुछ अन्य ने खुद को पृथकवास में रखा हुआ है।

वहीं एक समाचार एजेंसी से बातचीत में मौलाना ने कहा कि वह फरार नहीं हैं, बल्कि दिल्ली में क्वारंटीन हैं। साद ने कहा कि इसी वजह से मामले की जांच कर रही एजेंसियों के नोटिस का जवाब दिया है। जांच एजेंसी ने मुझसे कोरोना की जांच कराने के लिए कहा था जो चल रहा है। जल्द ही उसकी रिपोर्ट आ जाएगी। साद ने यह भी कहा कि मेरे बेटे की मौजूदगी में मेरे घर की तलाशी भी ली गई। साथ ही साद ने सवाल किया कि यह कैसे संभव होता अगर मैं छिपा होता?

मौलाना साद ने कहा कि मरकज के 6 लोगों की एक टीम ने निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन के एसएचओ से मुलाकात कर यहां के हालात के बारे बताया था। दूसरे राज्यों के लोग जो लोग मरकज में हैं उन्होंने उनके घर पहुंचाने के लिए पुलिस से दिशानिर्देश की मांग की। बाद में मरकज की स्थिति से संबंधित एक पत्र भी अथॉरिटी को दिया गया। स्थानीय प्रशासन को मरकज की गतिविधियों के बारे में बताया गया था। जो कोई भी आकर मरकज में देखना चाहता है उनके लिए हर चीज खुली और पहुंच में है।

मौलाना साद ने कहा कि मैं किसी एक पर आरोप लगाना नहीं चाहता। इस परिस्थिति में जो कदम उठाए गए उसके बारे में न हमें न तो प्रशासन को जानकारी थी। हमने कई बार प्रशासन से कहा कि मरकज में शामिल लोगों को घर भेजने की व्यवस्था की जाए ताकि मरकज खाली किया जा सके, लेकिन उनकी तरफ से कोई भी जवाब नहीं आया। इसका सबूत हमारे पास है।

साद ने कहा कि जब हमने लोगों को घर छोड़ने के लिए खुद ही गाड़ियों की व्यवस्था कि और एसडीएम से इसके लिए अनुमति मांगी तो उन्होंने भी इसे स्वीकार नहीं किया। स्वास्थ्य अधिकारियों ने 25 मार्च को मरकज की स्थिति को समझने के लिए पहला दौरा किया और इसके बाद वे रोज आने लगे। अगर यह कदम पहले लिया गया होता तो स्थिति को संभाला जा सकता था।


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