20 हजार ट्रेन के कोच बनेंगे कोरोना आइसोलेशन सेंटर, किया जा रहा सैनेटाइज

कोरोना का कहर तेजी से बढ़ता जा रहा है। लेकिन इससे निपटने के लिए देश में अस्पतालो की भारी कमी है। ऐसे में कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए केंद्र सरकार बड़ा फैसला लेते हुए अब ट्रेन के डिब्बों को कोरोना आइसोलेशन सेंटर बनाने पर विचार कर रही है।

जानकारी के अनुसार, भारतीय रेल के पास इस वक्त 50 से 60 हजार कोच हैं. लेकिन फिलहाल सिर्फ 20 हजार कोच को आइसोलेशन सेंटर बनाने की बात चल रही है। यह कदम इसलिए भी उठाया जा रहा है कि फिलहाल कुछ वक्त के लिए सभी ट्रेनें अपनी-अपनी जगह पर खड़ी हुई हैं। बता दें कि कोरोना के कहर से चीन को महज 10 दिन के अंदर 1000 बेड का अस्पताल बनाना पड़ा था।

देशभर में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन घोषित हो चुका है। ऐसे में ये खाली ट्रेनें महामारी से लड़ने में बड़ा हथियार साबित हो सकती हैं। वैसे भी अगर देश में कोई बड़ी आपदा आती है तो घा’यलों को लाने, ले जाने और प्राथमिक उपचार देने के लिए ट्रेनों का इस्तेमाल किया जाता रहा है।

इधर, देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि कोरोना से बचाव के लिए रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत संस्था डीआरडीओ की लैब में भी सैनेटाइजर बनाया जा रहा है। अब तक 20 हजार लीटर सैनेटाइजर बनाया जा चुका है। इसमें से अकेले 10 हजार लीटर सैनेटाइजर दिल्ली पुलिस को दिया गया है। शेष दूसरे अलग-अलग सरकारी संस्थानों को दिया गया है। उन्होंने बताया कि डीआरडीओ ने दिल्ली पुलिस को 10 हजार मास्क की सप्लाई भी की है।

कोरोना से बचाव के लिए सैनेटाइजर बनाने के साथ ही डीआरडीओ के दूसरे संस्थान पर्सनल प्रोटेक्शन उपकरण जैसे बॉडी सूट बनाने का काम भी कर रहे हैं। उत्पादन ज़्यादा से ज़्यादा हों इस पर ध्यान दिया जा रहा है। रक्षा मंत्री ने बताया कि हमारे अधिकारी और कर्मचारी रात-दिन इस काम में लगे हुए हैं। ऑर्डिनेंस फ़ैक्ट्री बोर्ड भी सैनेटाइजर, मास्क और बॉडी सूट बना रहा है। वहीं भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड एक कदम आगे बढ़ाते हुए वेंटिलेटर बनाने के काम में लगा हुआ है।


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