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Thursday, October 21, 2021

तबलीगी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना – खबरों में था सांप्रदायिक रंग, देश की हुई बदनामी

निज़ामुद्दीन मरकज़ मामले में कोरोना के प्रसार को तबलीग जमात के सदस्यों से जोड़ने को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहीर करते हुए कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने खबरों को सांप्रदायिकता का रंग दिया था, जिससे देश की छवि खराब हुई।

प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका सहित कई याचिकाओं पर सुनवाई कर कहा कि वेब पोर्टल पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है। वो जो चाहे चलाते हैं। उनकी कोई जवाबदेही भी नहीं है। वे हमें कभी जवाब नहीं देते। वो संस्थाओं के खिलाफ बहुत बुरा लिखते है। लोगों के लिए तो भूल जाओ, संस्थान और जजों के लिए भी कुछ भी मनमाना लिखते कहते है। हमारा अनुभव यह रहा है कि वे केवल वीआईपी की आवाज सुनते हैं।

उन्‍होंने कहा कि अगर आप यूट्यूब देखेंगे तो पाएंगे कि कैसे फर्जी खबरें आसानी से प्रसारित की जा रही हैं और कोई भी यूट्यूब पर चैनल शुरू कर सकता। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या इससे निपटने के लिए कोई तंत्र है? आपके पास इलेक्ट्रानिक मीडिया और अखबारों के लिए तो व्यवस्था है लेकिन वेब पोर्टल के लिए कुछ करना होगा।

इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि नई आईटी रूल्स सोशल और डिजिटल मीडिया को रेग्युलेट करने के लिए बनाया गया है और रेग्युलेट करने का प्रयास किया गया है। जो मुद्दे बताए गए हैं उसे ही रेग्युलेट करने के लिए आईटी रूल्स बनाया गया है। इस दौरान उन्होने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि अलग-अलग हाई कोर्ट में आईटी रूल्स को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर किया जाए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग हाई कोर्ट अलग-अलग आदेश पारित कर रहा है।

शीर्ष अदालत ने विभिन्न उच्च न्यायालयों में आईटी नियमों को चुनौती देने वाले सभी मामलों को सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग करने वाली केंद्र की याचिका को भी उसी याचिका के साथ सूचीबद्ध किया गया। छह सप्ताह में मामले की सुनवाई होगी।

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