कोरोना: मुस्लिमों के उत्पीड़न के विरोध में 101 नौकरशाहों की मुख्यमंत्रियों-राज्यपालों को चिट्ठी

कोरोना संकट के बीच एक सौ एक पूर्व नौकरशाहों ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों को चिट्ठी लिखकर देश के कुछ हिस्सों में मुसलमानों के उत्पीड़न पर दुख प्रकट किया है।

इस चिट्ठी में लिखा गया कि तबलीगी जमात का मामला होने के बाद से मुस्लिमो को टारगेट किया जा रहा है। उनके खिलाफ देश में माहौल बनाया जा रहा है, ऐसे में वे भेदभाव का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे के जरिये मुस्लिमों का उत्पीड़न हो रहा है।

पूर्व नौकरशाहों ने लिखा है कि इस महामारी के कारण उत्पन्न डर एवं असुरक्षा का उपयोग विभिन्न स्थानों पर मुसलमानों को सार्वजनिक स्थानों से दूर रखने के लिए किया जाता है ताकि बाकी लोगों को कथित तौर पर बचाया जाए। उन्होंने कहा कि पूरा देश अप्रत्याशित सदमे से गुजर रहा है। उन्होंने कहा, इस महामारी ने हमें जो चुनौती दी है उससे हम एकजुट रह कर एवं एक दूसरे की मदद कर ही लड़ सकते हैं एवं उससे निजात पा सकते हैं। उन्होंने उन मुख्यमंत्रियों की सराहना की जो आम तौर पर और खासकर इस महामारी के संदर्भ में दृढतापूर्वक धर्मनिरपेक्ष बने रहें।

पूर्व नौकरशाहों ने कहा कि पारंपरिक तौर पर भारत से मित्रवत संबंध रखने वाले कुछ मुस्लिम देशों ने हालिया घटनाओं पर गंभीर चिंता प्रकट की है। उन्होंने लिखा, ‘लाखों भारतीय दूसरे देशों में रहते हैं और नौकरी करते हैं। हमें अपने गैर-भेदभावकारी पहलों और राहत कार्यों से सुनिश्चित करना होगा कि भारत में अल्पसंख्यकों को डरने की कोई जरूरत नहीं है। इससे उन देश आश्वस्त हो पाएंगे और वहां अच्छी-खासी संख्या में रह रहे भारतीयों को प्रतिक्रिया स्वरूप संभावित नुकसान से बचा पाएंगे।’

चिट्ठी लिखने वालों में पूर्व कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर, पूर्व आईपीएस ऑफिसर ए एस दुलत और जुलियो रिबेरो, पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह, दिल्ली के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग और पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त एस वाई कुरैशी शामिल हैं।


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