अहमदाबाद के सिविल अस्पताल को गुजरात हाईकोर्ट ने बताया कालकोठरी से बदतर

कोरोना संकट के बीच पीएम मोदी के गुजरात मॉडल की हवा निकलती जा रही है। गुजरात का अहमदाबाद कोरोना के मामले में चीन का वुहान बन चुका है। तो दूसरी और अस्पतालों की हालत बदतर हो रही है। अहमदाबाद (Ahmadabad) के सिविल अस्पताल को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने भी कड़ी टिप्पणी की है।

कोरोना वायरस महामारी को लेकर दायर के जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला और न्यायमूर्ति आई जे वोरा की खंडपीठ ने अस्पताल की तुलना कालकोठरी से करते हुए राज्य सरकार को खूब खरी खोटी सुनाई और कहा कि यह ‘निराशाजनक और दुखद है।’

अदालत ने कहा, ”यह काफी निराशाजनक और दुखद है कि आज की तारीख में सिविल अस्पताल की दशा दयनीय है। हम यह कहते हुए दुखी हैं कि आज की तारीख में सिविल अस्तपाल अहमदाबाद बहुत ही बदतर स्थिति में है।”

खंडपीठ ने कहा, ”जैसा कि हमने पहले कहा कि यह सिविल अस्पताल मरीजों के उपचार के लिए है, लेकिन ऐसा जान पड़ता है कि आज की तारीख में यह कालकोठरी जैसा है या यूं कहें कि उसे भी बदतर. दुर्भाग्य से गरीब और बेसहारा मरीजों के पास विकल्प नहीं है।”

अदालत ने यह भी पूछा कि क्या राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को तनिक भी भान है कि कि अस्पताल में क्या चल रहा है। इसी के साथ अदालत ने कई निर्देश भी दिए। अदालत का आदेश शनिवार को जारी किया गया।


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