चीन ने लद्दाख में भारतीय सैन्य गश्ती दल को बनाया बंधक, आर्मी चीफ ने किया दौरा

कोरोना संकट के बीच लद्दाख से लगी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चीन अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। उसने एक बार फिर से हिमाकत करते हुए भारतीय सेना और इंडो-टिबेटन बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के एक गश्ती दल को हिरासत में ले लिया। हालांकि दोनों देशों के बीच कमांडर स्तर की वार्ता के बाद दल को छोड़ दिया गया।

एनडीटीवी के मुताबिक, इस मामले में सेना ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को जानकारी दे दी है। साथ ही पांगोंग लेक के करीब हुए पूरे घटनाक्रम का भी ब्योरा दिया गया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस बुधवार को ही स्थितियां काफी खराब हुईं, जब भारतीय जवान और चीनी जवान आपस में भिड़ गए। इस भिड़ंत के दौरान आईटीबीपी जवानों के हथियार भी छीन लिए गए थे। हालांकि, बाद में उन्हें सभी हथियार लौटा दिए गए और जवानों को भी छोड़ दिया गया।

केंद्र सरकार को भेजी गई जानकारी के मुताबिक, चीनी सेना भारत में काफी अंदर तक आने में सफल हो गई थी और फिलहाल पांगोंग लेक में मोटर बोट के जरिए आक्रामक तौर पर निगरानी कर रही है। अधिकारी ने बताया कि यह घटना काफी बड़ी थी, लेकिन अब वहां शांति है। लेकिन यह अभी खत्म नहीं हुआ है। भारत और चीन दोनों ने ही अब बराबर संख्या में फौज की तैनाती कर दी है। चीन ने गलवन रिवर फ्रंट के साथ तीन अलग-अलग जगहों पर अपने टेंट लगा दिए हैं।

इस बीच भारतीय सेना के प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवाने ने शुक्रवार को लद्दाख में 14 कोर के मुख्यालय लेह का दौरा किया और चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बलों की सुरक्षा तैनाती की समीक्षा की। उन्होंने उत्तरी कमान (एनसी) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वाई. के. जोशी, 14 कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और अन्य अधिकारियों के साथ एलएसी की जमीनी स्थिति को जाना।

सेनाध्यक्ष का दौरा ये साफ करने के लिए काफी है कि दोनों देशों के बीच तनाव न केवल बरकरार है बल्कि बढ़ भी रहा है। खबरों के मुताबिक गलवान नदी और पेंगांग झील के किनारे दोनों ओर के हजारों सैनिक एक-दूसरे के सामने जमे हुए हैं। इस साल जब भारतीय सैनिकों ने इन दोनों ही जगहों पर कुछ छोटे सैनिक निर्माण करने शुरू किए तो चीनी सैनिकों ने विरोध किया और बात बढ़ गई। गलवान घाटी का मामला कुछ ज्यादा गंभीर है जहां चीनी सैनिकों की तादाद हजारों में बताई जा रही है।


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