एनपीआर पर बोली मोदी सरकार – किसी भी नागरिक को नहीं देना होगा कोई कागज

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को साफ किया है कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के अपडेशन के दौरान किसी भी नागरिक से कोई दस्तावेज एकत्र नहीं किया जाएगा। और आधार नंबर भी स्वेच्छा से ही उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में किए गए सवाल के लिखित जवाब में कहा, ‘एनपीआर अपडेट करने के दौरान किसी भी तरह का दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा।’ साथ ही ये भी जवाब दिया गया है कि इस दौरान ऐसा कोई वेरिफिकेशन नहीं किया जाएगा, जिससे किसी की नागरिकता पर सवाल खड़े हों।

उन्होंने कहा, ‘एनपीआर सबसे पहले 2010 में तैयार किया गया और 2015 में उसे अपडेट किया गया। नागरिकता कानून, 1955 के तहत नागरिकता (नागरिकता पंजीकरण व राष्ट्रीय पहचान पत्र) नियम, 2003 के नियम 3 के उपनियम-4 को तैयार किया गया जिसके तहत केंद्र सरकार को अप्रैल से सितंबर, 2020 के बीच जनसंख्या रजिस्टर को अपडेट करना होगा। हालांकि, इसमें असम शामिल नहीं होगा।’

नागरिकता संशोधन एक्ट के फैसले के तुरंत बाद भारत सरकार ने NPR को अपडेट कराने का फैसला किया था। 1 अप्रैल, 2020 से NPR अपडेट की प्रक्रिया शुरू होगी, जो कि जनगणना का पहला फेज़ होगी। NPR की प्रक्रिया के दौरान हर घर से जानकारी ली जाएगी, जिसमें सभी को सही जानकारी सरकार को देनी होगी। हालांकि, आधार कार्ड नंबर देना या ना देना व्यक्ति पर निर्भर होगा।

बता दें कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने एनपीआर की प्रक्रिया को खतरनाक करार देते हुए पूर्वोत्तर के राज्यों और गैर-बीजेपी शासित राज्यों के सीएम से अपील की है कि वे एनपीआर के फॉर्म को ध्यान से पढ़ें। उन्होंने साथ ही अनुरोध किया कि अपडेट करने के फैसले से पहले फॉर्म में लिखे सवालों और मानकों को भी ठीक से देखें। उधर, केरल सरकार ने घोषणा की है कि वे जनगणना प्रक्रिया का पालन करेंगे, लेकिन एनपीआर को लेकर सहयोग नहीं करेंगे।


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