करोड़ों की ठगी करने वाला कैंडी बाबा गिरफ्तार, 50 से अधिक मामलों में ढूंढ रही थी पुलिस

हरियाणा समेत कई राज्यों में करोड़ों रुपये ठगने वाले राजेश उर्फ कैंडी बाबा को क्राइम ब्रांच सेक्टर-30 की टीम ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी बाबा को अदालत में पेश कर 10 दिन का रिमांड लिया है और उससे पूछताछ कर रही है।

जानकारी के अनुसार, वह फरीदाबाद में भेष बदलकर छुपकर रह रहा था। लॉकडाउन के चलते वह यहां छिपा बैठा था। उस पर शहर में विभिन्न थानों में धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं। इसके साथ ही कैंडी और उसके साथियों पर हरियाणा और पंजाब के विभिन्न शहरों में धोखाधड़ी के साथ-साथ अवैध असलहा रखने की भी एफआईआर दर्ज है।

एसीपी क्राइम अनिल कुमार ने बताया कि सेक्टर-30 क्राइम ब्रांच प्रभारी सुरेंद्र की टीम ने बाबा को गिरफ्तार किया है। बाबा के खिलाफ सेक्टर-17 थाने में 25 अप्रैल 2019 को दर्ज मामले में आरोप है कि प्रदीप नाम के एक कारोबारी को सस्ते दामों पर सोना दिलाने के नाम पर 1.40 करोड़ रुपये की ठगी की थी। बाबा ने दस लोगों के साथ ठगी का जाल बिछाकर प्रदीप को फंसाया था। प्रदीप का आरोप था कि कैथल निवासी सुरेंद्र मलिक उनके भाई का दोस्त है। वह अक्सर फरीदाबाद आता था और उनसे भी मिलता था।

जून 2018 में सुरेंद्र उनके घर आया। उसके पास रुपयों से भरा बैग था। आरोपी ने कहा कि उसे ये रुपये सुबह किसी को देने हैं। रुपया अधिक है। इसे लेकर किसी होटल में रुकना ठीक नहीं है। अगले दिन सुरेंद्र, प्रदीप को अपने साथ लेकर सूरजकुंड पहुंचा और वहां रुपयों से भरा बैग कैंडी बाबा की गाड़ी में रखवा दिया। कैंडी बाबा के साथ ज्वैलर पारस जैन सहित कई लोग थे।

प्रदीप के मुताबिक सुरेंद्र उसे झांसे में लेकर पहले 14 लाख रुपये में आधा किलो सोना मंगवाकर दिया था।  इस तरह प्रदीप उनकी बातों में आता गया। प्रदीप 70 लाख रुपये देकर ढाई किलो सोना मंगवाने के लिए कहा। इस दौरान प्रदीप का एक साथी संदीप भी मौजूद था। संदीप ने भी लालच में आकर सुरेंद्र को 70 लाख रुपये देकर ढाई किलो सोना मंगाने का ऑर्डर दे दिया।

इस तरह सुरेंद्र ने 1.40 करोड़ रुपये आरोपी बाबा व उसके दस साथियों ने मिलकर ठग लिए थे। इस मामले की छानबीन में जुटी क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपी बाबा को गिरफ्तार किया है। क्राइम ब्रांच की टीम उनसे पूछताछ कर रही है।  आरोपी कैंडी बाबा पर फरीदाबाद के अलावा प्रदेश के कई जिलों में 50 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। इन सभी जिलों की पुलिस उसके पीछे पड़ी हुई थी. करीब एक साल की मशक्कत के बाद फरीदाबाद पुलिस को सफलता मिली है।