यस बैंक पर अनिल अंबानी-सुभाष चंद्रा की कंपनियों का बैड लोन, संजय सिंह बोले – पीएम मोदी के है मित्र

यस बैंक डूबने के मामले में 10 बड़े व्यापारिक समूहों से संबंधित कम से कम 44 कंपनियों का हाथ है। इन कंपनियों का बैंक का 34,000 करोड़ रुपए का बैड लोन है। जिनमे उद्योगपति अनिल अंबानी ग्रुप की कम से कम नौ कंपनियों पर 12,800 करोड़ रुपए का एनपीए है। इसी तरह सुभाष चंद्र के एस्सेल ग्रुप से संबंधित कम से कम 16 कंपनियों पर 8,400 करोड़ रुपए का एनपीए है। इसके अलावा डीएचएफएल समूह के दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन और विश्वास रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड ने बैंक से 4,735 करोड़ रुपए का कर्ज लिया। बैंक ने इसके अलावा जेट एयरवेज को भी 1,100 करोड़ रुपए का लोन दिया है।

ऐसे में सोमवार को आप के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय सिंह ने कहा कि भाजपा ने चंदा देने वाले डिफाल्टरों से ही बैंक में डकैती डलवाई। सरकार के पास सभी कंपनियों की जानकारी थी। इसके बावजूद कार्रवाई करने की जगह आम आदमी का पैसा लुटवाया गया। सिंह ने कहा कि वित्त मंत्री के मुताबिक जब गड़बड़ी की सूचना मिली तो आरबीआइ से निगरानी करवाई। सवाल उठता है कि आरबीआई की निगरानी में 2017 से 2019 के बीच एक लाख करोड़ का कर्जा कैसे दे दिया गया?

उन्होने कहा कि भाजपा का  हिन्दू मुस्लिम वायरस कोराना से ज्यादा खतरनाक है। एक तरफ दिल्ली में दंगा करवाते रहे और दूसरी तरफ लूट करवाते रहे। सिंह ने बताया कि अनिल अंबानी ग्रुप, एस्सले ग्रुप, रेडियस डेवलपर्स समेत कई कंपनियों को करोड़ों का लोन यस बैंक से लिया और भाजपा को चंदा दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार डिफाल्टरों की मदद कर रही है। सिंह ने 20 मई 2018 को प्रवर्तन निदेशालय को लिखेे पत्र की जानकारी देते हुए बताया कि मैंने बकायदारों की जांच करने और उनके पासपोर्ट जब्त करने की मांग की थी। बैंकों से पैसा लेकर विदेश भागने वाले नीरव मोदी, विजय माल्या, मेहुल चौकसी चिढ़ाते रहते हैं। अभी तक किसी को नहीं पकड़ा गया। कालाधन लाने वाली सरकार अपने मित्रों को विदेश भगा रही है।

येस बैंक के बैड लोन में केर्कर गुप्र भी है, जिसकी दो कंपनियों कंपनियों कॉक्स एंड किंग्स और गो ट्रेवल्स ने करीब 1,000 करोड़ रुपए का कर्ज लिया, जो बैड लोन में तब्दील होता नजर आता है। बी एम खेतान ग्रुप की भारत इंफ्रा, मैकलियोड रसेल असम टी और एवरेडी (1,250 करोड़ रुपए), ओंकार रियल्टर्स और डेवलपर्स के दो प्रोजेक्ट (2,710 करोड़ रुपए), रेडियस डेवलपर्स (1,200 करोड़ रुपए) और थापर ग्रुप की सीजी पावर (500 करोड़ रुपए) पर बैड लोन है।


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