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रमजान में भी नहीं माने आतंकी, इसलिए सीजफायर का वापस लिया फैसला: सेना प्रमुख

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जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत का बयान आया है। उन्होंने कहा है कि राज्यपाल शासन से सेना के काम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और आतंक के खिलाफ ऑपरेशन पहले की तरह जारी रहेगा।

उन्होंने कहा, ‘अभियान पहले की तरह ही चलाए जा रहे थे। फिर हमने अभियानों पर रोक का वक्त देखा क्योंकि हम चाहते थे कि रमजान के दौरान लोगों को बगैर किसी समस्या के नमाज अदा करने का मौका मिले। इसके बावजूद आतंकवादियों ने अपनी गतिविधि जारी रखी, जिसके कारण अभियानों पर रोक का फैसला रद्द कर दिया गया।’

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राज्यपाल शासन की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा, ‘हम नहीं समझते कि इसका कोई प्रभाव पड़ेगा. हमारे यहां राजनीतिक दखल नहीं है।’ उन्होंने कहा कि आर्मी के काम करने के तौर-तरीके पर कभी कोई बंदिश नहीं रही है। जनरल रावत ने कहा कि सुरक्षा बलों के नियम काफी सख्त हैं और उन्हीं के मुताबिक कार्रवाई करनी होती है।

रमजान के दौरान सीजफायर खत्म होने के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबल सक्रिय हो गए हैं। जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।पुलवामा जिले के त्राल में एक एनकाउंटर में मंगलवार को सुरक्षाबलों ने 3 आतंकियों को मार गिराया था।

बता दें कि मंगलवार को पीडीपी और बीजेपी की गठबंधन वाली सरकार के गिरने के बाद बुधवार को राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद यहां राज्यपाल शासन लागू कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर में अगले छह महीने तक राज्यपाल शासन की घोषणा हुई है।

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