अमेरिकन बार एसोसिएशन ने की सफूरा जरगर की रिहाई की मांग, बताया – अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ

सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स, अमेरिकन बार एसोसिएशन ने सीएए विरोधी प्रदर्शनो में शामिल जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्रा सफूरा जरगर की हिरासत को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ बताते हुए रिहाई की मांग की है। एसोसिएशनने कहा है कि सफूरा जरगर का प्री-ट्रायल डिटेंशन अंतरराष्ट्रीय कानून, जिनमें वो संधियां भी शामिल है, भारत जिनमें स्टेट-पार्टी है, के मानकों के अनुरूप प्रतीत नहीं होता है।

लाइव लॉ डॉट इन की रिपोर्ट के मुताबिक सेंटर ने कहा है, “अंतरराष्ट्रीय कानून, जिनमें वो संधियां भी शामिल हैं, भारत जिनमें स्टेट पार्टी है, केवल संकीर्ण परिस्थितियों में प्री-ट्रायल कस्टडी की अनुमति देता है, सुश्री जरगर का मामला ऐसा है नहीं। इंटरनेशनल कोवनंट ऑफ सिविल एंड पॉलिटिकल राइट (ICCPR) कहता है कि “यह सामान्य नियम नहीं होना चाहिए कि ट्रायल का इंतजार कर रहे व्यक्तियों को हिरासत में रखा जाएगा।”

बता दें कि जामिया कोऑर्डिनेशन कमिटी की सदस्य सफूरा पर गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था। उन पर राजधानी के पूर्वोत्तर इलाक़ों में सांप्रदायिक दं’गे भड़काने की साजिश रचने का आरोप है।

पिछले गुरुरवार को नई दिल्ली स्‍थ‌ित अतिरिक्त सत्र न्यायालय, पटियाला हाउस ने सफूरा जरगर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेन्द्र राणा ने कहा कि जांच के दौरान एक बड़ी साजिश सामने आई थी। यदि किसी एक साजिशकर्ता के खिलाफ बयान या कोई कृत्य और साजिश का सबूत है तो वह सब पर लागू होता है।

उन्होंने कहा कि मामले के अन्य साजिशकर्ता के कृत्य और भड़काऊ भाषण इंडियन एविडेंस एक्ट के तहत आरोपी पर भी लागू होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस बात का सबूत भी है कि हिं’सा के दौरान चक्का जाम करने की एक साजिश तो थी।

हालांकि कोर्ट ने सफूरा जरगर के स्वास्थ्य को देखते हुए तिहाड़ जेल के अधीक्षक को पर्याप्त चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की बात कही। जामिया में एमफिल की स्टूडेंट सफूरा जरगर प्रेगनेंट हैं।


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