रामदेव का फर्जीवाड़ा – ट्रायल में मरीजों को दी एलोपैथिक दवा, रिपोर्ट से पहले लांच की कोरोना की दवा

बाबा रामदेव की और से खोजी गई कोरोना की दवा कोरोनिल का फर्जीवाड़ा सामने आ गया है। दवा के ट्राइल के दौरान न केवल मरीजों को एलोपैथिक दवा दी गई। बल्कि फ़ाइनल रिपोर्ट आने से पहले ही दवा लॉंच कर दी गई।

राजस्थान सरकार ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (NIMS) में क्लिनिकल ट्रायल की कोई जानकारी नहीं थी। जयपुर में स्थिति NIMS में कोरोना मरीज भर्ती हैं। सबसे महत्वपूर्ण ये हैं ट्रायल के दौरान जब हल्के लक्षण वाले मरीजों को बुखार हुआ तो उन्हें एलोपैथिक दवाएं दी गईं। ट्रायल सिर्फ संक्रमितों के संपर्क में आए और हल्के लक्षणों वाले मरीजों पर किया गया। गंभीर रूप से बीमार मरीजों और सांस लेने में गंभीर परेशानी से गुजर रहे मरीजों को इससे बाहर रखा गया।

द इंडियन एक्सप्रेस ने जब NIMS के मुख्य जांचकर्ता डॉक्टर गनपत देवपुत्र से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि ये सिर्फ 100 कोरोना मरीजों के सैंपल साइज वाली अंतरिम रिपोर्ट है। अंतिम रिपोर्ट और निष्कर्ष 15-25 दिनों के बाद प्रकाशित किए जाएंगे। इसके बाद इसे समीक्षा के लिए भेजा जाएगा। पूछने पर कि क्या एलोपैथिक दवाओं को लक्षण विकसित होने पर परीक्षण के दौरान हल्के रूप से रोगग्रस्त मरीजों को दिया जाता था। उन्होंने कहा हां।

डॉक्टर देवपुत्र ने बताया कि ये डबल-ब्लाइंड बेतरतीब ट्रायल है। 50 मरीज प्लेसीबो पर थे और 50 और बाकी 50 एक्टिव दवाओं (आयुर्वेदिक चिकित्सा) पर थे। हमने पहले, दूसरे और सातवे दिन आरटी पीसीआर टेस्ट किया। तीसरे दिन 69 फीसदी मरीज निगेटिव पाए गए। प्लेसीबो ग्रुप में सिर्फ पचास फीसीद मरीज निगेटिप पाए गए। उन्होंने कहा कि सातवे दिन ग्रुप में सभी मरीजों को टेस्ट निगेटिव आए। प्लेसीबो ग्रुप में 65 फीसदी मरीजों के टेस्ट निगेटिव आए और बाकी 35 फीसदी मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

बता दें कि पतंजलि ग्रुप ने मंगलवार सुबह ‘कोरोनिल टैबलेट’ और ‘श्वासारि वटी’ नाम की दो दवायें लॉन्च कीं जिनके बारे में कंपनी ने दावा किया है कि ‘ये कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी का आयुर्वेदिक इलाज हैं।’ रामदेव ने दावा किया है कि “कोविड-19 की दवाओं की इस किट को दो स्तर के ट्रायल के बाद तैयार किया गया है। पहले क्लीनिकल कंट्रोल स्टडी की गई थी और फिर क्लीनिकल कंट्रोल ट्रायल भी किया जा चुका है।”

रामदेव ने कहा, ‘‘यह दवाई शत प्रतिशत (कोविड-19) मरीजों को फायदा पहुंचा रही है।100 मरीजों पर नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल किया गया, जिसमें तीन दिन के अंदर 69 प्रतिशत और चार दिन के अंदर शत प्रतिशत मरीज ठीक हो गये और उनकी जांच रिपोर्ट नेगेटिव आई।’’


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