निजीकरण के बाद कंपनियां तय करेगी रेल का किराया, महंगा हो सकता है टिकट

केंद्र की मोदी सरकार के अधीन रेलवे निजीकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दरअसल, मंत्रालय ने औपचारिक रूप से 109 जोड़ी निजी ट्रेन चलाने के लिए रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन (आरएफक्यू) मंगाए हैं। इसकी शुरुआत 151 आधुनिक ट्रेनाें से होगी। इन ट्रेनों के निजी हाथों में जाने के बाद ट्रेनों का किराया भी निजी कंपनियों को निर्धारण करने की आजादी होगी।

अमर उजाला के अनुसार, अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार बोलीदाताओं को परियोजना लेने के लिए अनुरोध प्रस्ताव में सकल राजस्व में हिस्सेदारी की पेशकश करनी होगी। अनुरोध प्रस्ताव के अनुसार रेलवे ने निजी इकाइयों को यात्रियों से किराया वसूलने को लेकर आजादी देगी। साथ ही वे राजस्व सृजित करने के लिए नए विकल्प टटोल सकते हैं।

आरएफक्यू में कहा गया है, ‘सकल राजस्व की परिभाषा अभी विचाराधीन है। वैसे इसमें निम्न बातें शामिल हो सकती है। यात्रियों या किसी तीसरे पक्ष द्वारा यात्रियों को सेवा देने के एवज में संबंधित कंपनी को प्राप्त राशि इसके अंतर्गत आएगा। इसमें टिकट पर किराया राशि, पसंदीदा सीट का विकल्प, सामान/पार्सल/कार्गो (अगर टिकट किराया में शामिल नहीं है) के लिए शुल्क शामिल होगा।’

दस्तावेज के अनुसार, ‘यात्रा के दौरान सेवाओं जैसे खान-पान, बिछावन, मांग पर उपलब्ध कराई गई कोई सामग्री, वाई-फाई (अगर टिकट किराया में शामिल नहीं है)। इसके अलावा विज्ञापन, ब्रांडिंग जैसी चीजों से प्राप्त राशि भी सकल राजस्व का हिस्सा होगी।’

भारतीय रेल नेटवर्क के 12 क्लस्टरों में 109 ओडी जोड़ी रूट तैयार किए गए हैं। हर ट्रेन में मिनिमम 16 कोच होंगे। इन ट्रेनों के वित्तपोषण, खरीद, परिचालन और रखरखाव के लिए निजी इकाई जिम्मेदार होगी। रेलवे के मुताबिक, इस कदम के पीछे मकसद भारतीय रेल में रखरखाव की कम लागत, कम ट्रांजिट टाइम के साथ नई तकनीक का विकास करना है और नौकरियों के अवसर बढ़ाना, बेहतर सुरक्षा और विश्व स्तरीय यात्रा का अनुभव कराना है। पिछले साल आइआरसीटीसी ने पहली निजी ट्रेन लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस शुरू की थी।


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