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Tuesday, October 19, 2021

अफगान सांसद के निर्वासन को भारत सरकार ने बताया त्रुटि, अब आपातकालीन वीजा दिया गया

भारत सरकार ने गुरुवार को कहा कि 20 अगस्त को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से अफगान संसद की एक महिला सदस्य का निर्वासन एक अनजाने में हुई त्रुटि थी। बयान में कहा गया कि फरयाब प्रांत का प्रतिनिधित्व करने वाली जिरगा की सदस्य रंगिना कारगर से संपर्क किया गया और जो हुआ उसके लिए “माफी मांगी” गई। साथ ही उन्हे एक आपातकालीन वीजा के लिए आवेदन करने के लिए कहा गया।अफगानिस्तान की स्थिति पर नेताओं को जानकारी देने के लिए सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में यह मुद्दा उठाया गया था।

इंडियन एक्सप्रेस ने गुरुवार को बताया था कि करगर 20 अगस्त की शुरुआत में इस्तांबुल से दुबई फ्लाइट के जरिये आईजीआई एयरपोर्ट पहुंची। यद्यपि उनके पास एक राजनयिक/आधिकारिक पासपोर्ट था जो भारत के साथ पारस्परिक व्यवस्था के तहत वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा प्रदान करता है, हवाई अड्डे पर प्रतीक्षा करने के बाद उन्हे उसी एयरलाइन द्वारा दुबई के रास्ते इस्तांबुल वापस भेज दिया गया था।

सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे, आनंद शर्मा और अधीर रंजन चौधरी ने सर्वदलीय बैठक में यह मुद्दा उठाया। नेताओं ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से पूछा, “विदेश मंत्रालय ने अफगानिस्तान के एक अनुभवी राजनेता के खिलाफ ऐसा कदम क्यों उठाया जो अक्सर भारत की यात्रा करती है और एक राजनयिक पासपोर्ट रखती है?”

सूत्रों ने कहा कि सरकारी पक्ष ने जवाब दिया कि यह एक अनपेक्षित गलती थी क्योंकि तालिबान द्वारा भारतीय वीजा वाले कुछ पासपोर्ट छीन लिए जाने की रिपोर्ट के बाद “घबराहट” थी। अलर्ट भी किया गया था। खड़गे ने बाद में संवाददाताओं से कहा, ‘हमने महिला सांसद के निर्वासन का मुद्दा उठाया। उन्होंने (जयशंकर) कहा कि यह एक गलती थी और भविष्य में ऐसी घटना नहीं होगी। उन्हें (सरकार) इस पर खेद है।”

कारगर ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, सरकार ने कारगर से भी संपर्क किया। “जेपी सिंह (विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान के संयुक्त सचिव प्रभारी) ने मुझसे बात की। जो कुछ हुआ उसके लिए उन्होंने माफी मांगी और मुझसे ई-आपातकालीन वीजा के लिए आवेदन करने को कहा। मैंने उनसे पूछा कि क्या आधिकारिक पासपोर्ट अब वैध नहीं है, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। मैंने उनसे कहा कि मैंने अपनी बेटी के लिए (अगस्त) 19 को ई-वीजा की कोशिश की थी, लेकिन आवेदन का कोई जवाब नहीं मिला।”

उन्होने कहा कि उसने दिल्ली हवाई अड्डे पर 20 अगस्त को सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक 16 घंटे इंतजार किया, इससे पहले कि उसे दुबई के रास्ते इस्तांबुल के लिए वापस लाया गया। सर्वदलीय बैठक से पहले, कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को ट्वीट करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि विदेश मंत्री बैठक में बताएंगे कि वैध यात्रा दस्तावेज होने के बावजूद अफगान सांसद को निर्वासित क्यों किया गया। उन्होंने कहा, ‘जब हमें अफगानिस्तान की महिलाओं के साथ खड़े होने की जरूरत होती है तो हम उनके खिलाफ खड़े नजर आते हैं।”

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