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Thursday, October 21, 2021

NRC में शामिल होने के बावजूद असम की 80 वर्षीय महिला को ‘विदेशी’ घोषित

80 वर्षीय भंडारी दास 1967 में अपने पति और दो बच्चों के साथ बांग्लादेश से भारत भाग कर आई थी। वह पिछले पांच दशकों से आसाम के एक नजदीकी जिले में रह रही थी, और 1970 में एक भारतीय मतदाता बन गई। बावजूद इसके  वह अब एक बार फिर से ‘विदेशी’ बन गई है।

असम आने के बाद, दास को 1967 में केंद्र सरकार द्वारा ‘राहत पात्रता प्रमाणपत्र’ दिया गया था। फिर 1970 में, वह एक भारतीय मतदाता बन गईं और तब से 54 साल बीत चुके हैं। दास का नाम 2019 के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स में भी शामिल था। हालांकि, 2008 में पुलिस अधीक्षक (सीमा) द्वारा उनके खिलाफ फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में मामला दर्ज किया गया।

एनडीटीवी ने बताया, उस मामले के संदर्भ में, अदालत ने फैसला सुनाया कि वह और उनके बच्चे ‘विदेशी’ हैं। मतलब, भंडारी दास अगले दशक तक वोट देने का अधिकार खो देंगी। क्योंकि भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए 10 साल की प्रतीक्षा अवधि है, जिसके दौरान उनका वोट देने का अधिकार छीन लिया जाएगा।

उन्होने एनडीटीवी से कहा, भंडारी को अपने वोट का अधिकार खोने की चिंता नहीं है। “अगले दस वर्षों में, मैं और मेरा परिवार भारत के स्थायी निवासी बन जाएंगे।” इस राहत की वजह यह है कि भंडारी को अवैध विदेशी नहीं कहा गया। हालाँकि उन्होने कुछ समय के लिए अपना वोट देने का अधिकार खो दिया है, वह बाद में एक भारतीय नागरिक या कम से कम उनके बच्चे बन जाएंगे।

भंडारी दास 16 वर्ष की थीं, जब उन्होंने 1961 में सिलहट, बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) में राजेंद्र दास से शादी की, और छह साल बाद सीमा पार कर भारत आ गई। इस संबंध में भंडारी दास ने कहा, ”हमारी धार्मिक आस्थाओं के कारण हमें वहां (पूर्वी पाकिस्तान) उत्पी’ड़न सहना पड़ा। हम पर हर तरफ से हम’ले हुए। इसके अलावा, हमारे कई पड़ोसी भारत चले गए। यह हमारे लिए सबसे कठिन समय था। जब तीन साल पहले कोर्ट से नोटिस आया, तो मैंने सोचा कि मुझे वापस बांग्लादेश जाना होगा, जो मैं निश्चित रूप से नहीं जानी चाहती था।”

उनके परिवार ने कथित तौर पर बहुत कम भोजन या पानी के साथ पूरे दिन की यात्रा की, आधी रात तक सिलीगुड़ी के पास एक शरणार्थी शिविर में पहुंच गए। तीन साल तक दास और उनके पति वहीं रहे। वे सिलचर शहर के पास भोलानाथपुर गांव में कुछ काम पाने में कामयाब रहे और वहां शिफ्ट हो गए। उसके दो बच्चे उसी गांव में पैदा हुए थे।

भंडारी के पति राजेंद्र का 2009 में निधन हो गया। वह वर्तमान में अपने बेटे राजकमल दास और उनके परिवार के साथ रहती हैं। राजकमल का जन्म 1971 में भोलानाथपुर, भारत में हुआ था।

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