पांच सालों में 5.8 लाख भारतीयों ने छोड़ी देश की नागरिकता, अमेरिका बनी पहली पसंद

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) से नागरिकता छीन जाने के डर से एक तरफ देश में लाखों लोग सड़कों पर है तो दूसरी और पांच लाख से ज्यादा भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी। रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी, 2015 से अक्टूबर 2019 के बीच 5.8 लाख भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी।

खबर है कि 2019 के शुरुआती दस महीनों में रिकॉर्ड 1.1 लाख भारतीयों ने अपने पासपोर्ट सरेंडर किये। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों की सबसे अधिक संख्या 2016 में रही। इस साल  रिकॉर्ड 1.3 लाख भारतीयों ने देश की नागरिकता छोड़ दी।

अन्य सालों में भी प्रति वर्ष एक लाख से अधिक भारतीयों ने दूसरे देश के नागरिकता देने के लिए भारतीय पासपोर्ट वापस कर दिए। भारतीय विदेश मंत्रालय के पास दुनियाभर में भारतीय नागरिकता छोड़ने वाले नागरिकों और भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले लोगों का संकलन होता है।

रिपोर्ट के मुताबिक साल 2017 में 106072, 2018 में 119599, 2019 में 111244 लोगों ने देश की नागरिकता छोड़ने के लिए आवेदन किया। इनमें 44 फीसदी यानी 2.5 लाख के करीब भारतीयों ने अमेरिकी नागरिकता लेने के लिए आवेदन किया। इसके अलावा एक लाख से ज्यादा भारतीयों ने ऑस्ट्रेलिया में बसने के लिए भारतीय नागरिकता छोड़ दी।

94874 भारतीय ने कनाडा की नागरिकता के लिए आवेदन किया। वहीं अन्य 1.3 लाख भारतीय ने दूसरे देश की नागरिकता के लिए आवेदन किया। इस बीच पाकिस्तान और सीरिया जैसे देशों की नागरिकता के लिए किसी भी भारतीय ने आवेदन नहीं किया। रिपोर्ट के मुताबिक 35986 भारतीय ने वहां की नागरिकता के लिए आवेदन किया।

इन लोगों ने भारत की नागरिकता छोड़ किसी अन्य देश की नागरिकता लेना पसंद किया। रिपोर्ट के मुताबिक लोगों ने सबसे अधिक अमेरिका की नागरिकता ली। भारतीयों ने इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की नागरिकता की आकर्षित हुए।


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