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मंदसौर गोलीकांड: जांच आयोग ने दी पुलिस को क्लीन चिट, बताया – न्यायसंगत

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मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में बीते वर्ष किसान आंदोलन के दौरान हुए गोलीकांड मामले की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग ने मध्य प्रदेश पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों को क्लीनचिट दे दी है।

9 महीने देरी से आई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन परिस्थितियों में भीड़ को तितर-बितर करने और पुलिस बल की जीवन रक्षा के लिए गोली चालन ‘नितांत आवश्यक’ और ‘न्यायसंगत’ था।

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जेके जैन आयोग ने 211 गवाहों के बयान ले जिनमें 26 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल थे। आयोग ने कलेक्टर स्वतंत्र कुमार और एसपी ओपी त्रिपाठी को भी सीधे तौर पर दोषी नहीं ठहराया।

आयोग का कहना है कि किसान और अफसरों के बीच संवादहीनता के कारण जिला प्रशासन को उनकी मांगों और समस्याओं की जानकारी नहीं थी और उन्हें जानने का प्रयास भी नहीं किया गया।

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि गोली चलाने में पुलिस ने नियमों का पालन नहीं किया।  पहले पांव पर गोली चलाना चाहिए थी, लेकिन इसका ध्यान नहीं रखा गया। बता दें कि इस गोलीकांड मे 5 किसानों की मौत हुई थी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि घटना वाले दिन महू-नीमच फोरलेन के पास चक्काजाम किया गया था। तत्कालीन सीएसपी जब जवानों के साथ वहां पहुंचे तो असामाजिक तत्वों ने सीआरपीएफ के एएसआई सहित 7 जवानों को घेर लिया। उन पर पेट्रोल बम फेंके और मारपीट की।

स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई तो पुलिस ने गोली चलाने की चेतावनी दी. जिसके बाद आरक्षक विजय कुमार ने दो गोली चलाई। यहां यह भी जिक्र किया गया है कि उस वक्त घटना स्थल पर कोई भी किसान नेता मौजूद नहीं था जिसके चलते आंदोलन असामाजिक तत्वों के नियंत्रण में चला गया था। जिनसे कन्हैयालाल और पूनमचंद की मौत हो गई।

एएसआई बी. शाजी ने तीन तो अरुण कुमार ने दो गोली चलाईं जो मुरली, सुरेंद्र और जितेंद्र को लगीं। पिपल्यामंडी में आरक्षक प्रकाश ने चार, अखिलेश ने नौ, वीर बहादुर ने तीन, हरिओम ने तीन, और नंदलाल ने एक गोली चलाई. जिनमें चैनराम, अभिषेक, और सत्यनारायण मारे गए।  इसके अलावा रोड सिंह, अमृतराम और दशरश गोली लगने से घायल हो गए थे।

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