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एमपी: किसान आंदोलन के बीच, दो किसानों ने की खुदकुशी और एक की मौत

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मध्यप्रदेश में पिछले साल छह जून को मंदसौर जिले में किसानों पर पुलिस जवानों द्वारा की गई फायरिंग और पिटाई में मारे गए सात लोगों की मौत के एक वर्ष पूरा होने पर किसानों ने शुक्रवार से 10 दिन के लिए आंदोलन का ऐलान किया है.

इस आंदोलन की शुरुआत के  साथ ही पिछले 24 घंटे में तीन किसानों की मौत हुई. जिनमें से दो किसानों ने क़र्ज़ से परेशान होकर आत्महत्या की है, जबकि एक किसान की कृषि उपज मंडी में कथित अव्यवस्थाओं के चलते मौत हुई है.

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इसी बीच आंदोलन को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह का विवादित बयान आया है. उन्होंने कहा कि मीडिया में आने के लिए कुछ किसान तरह-तरह के उपक्रम कर रहे हैं. जिनमे किसानों की आत्महत्या भी शामिल है. एक किसान ने बालाघाट एवं शाजापुर ज़िलों में खुदकुशी की है, जबकि सिवनी जिले की सिमरिया कृषि उपज मंडी में कथित अव्यवस्थाओं के चलते चना बेचने आए एक किसान ने दम तोड़ा है.

कृषि मंत्री ने कहा ‘मीडिया में आने के लिए असामान्य कार्य करना होता है. देश में 12-14 करोड़ किसान हैं. हमेशा से ऐसे संगठन रहेंगे जिनमें कुछ हजार लोग होंगे.’ कृषि मंत्री से जब पत्रकारों ने सवाल पूछा- ‘देश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं और मध्यप्रदेश में किसानों का बड़ा आंदोलन चल रहा है.’

इसके जवाब में कृषि मत्री ने कहा, ऐसा नहीं है कि हमारी सरकार किसानों के लिए कुछ नहीं किया. मध्यप्रदेश में भी बहुत काम हुए हैं, जहां तक प्रदर्शन की बात है तो कई बार मीडिया में पब्लिसिटी के लिए भी कुछ किसान तरह-तरह के उपक्रम करते रहते हैं.”

गौरतलब है कि क़र्ज़ माफ़ी, अपनी उपजों के वाजिब दाम एवं अन्य मांगों को लेकर किसानों का 10 दिवसीय देशव्यापी ‘गांव बंद आंदोलन’ मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में एक जून से जारी है.

किसानों की मांग है कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया जाए. कृषि ऋण माफ किया जाए, किसानों को उसकी फसल का लागत मूल्य में लाभ जोड़ कर दिया जाए. किसानों की जमीन कुर्क के जो नोटिस भेजे गए हैं वो वापस लिए जाएं.

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