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Tuesday, October 19, 2021

आखिरी उम्मीद भी खत्म- तालिबान के हाथों में जाता पंजशीर, अहमद मसूद के लड़ा’के बना रहे आ’त्मसम’र्पण की योजना

नयी दिल्ली – अफ़ग़ानिस्तान को लेकर आखिरी उम्मीद रहे अहमद मसूद भी ख’त्म होती नज़र आ रही है. टेलीग्राफ में प्रकाशित खबर के अनुसार, तालि’बान के विद्रो’हियों के पास संसाधन की कमी है जिसके कारण वो अत्याधुनिक हथि’यारों से लेस तालि’बान का मुकाबला करने में समर्थ नही है. अब खबर आई है की लड़ाके आत्म समर्पण की योजना बना रहें हैं.

कुछ रिपोर्ट्स आई थीं, जिनमें बताया जा रहा था कि पंजशीर के ‘शेर’ कहे जाने वाले अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद के नेतृत्व में तालिबान के खिला’फ जं’ग छेड़ने की तैयारी है. खास बात यह है कि चाहे 1990 का गृहयु’द्ध हो या उससे एक दशक पहले सोवियत का दखल, पं’जशीर घाटी पर कोई फतह हासिल नहीं कर सका.

समाचार पत्र द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, पंजशीर में ल’ड़ाके संसाधन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहायता नहीं मिलने के चलते स’रेंड’र करने की तैयारी कर रहे हैं. मसूद के सलाहकार जिनकी पहचान द टेलीग्राफ ने उजागर नहीं की है, उन्होंने बताया कि 32 वर्षीय अपने सम्मान के साथ हथि’यार डालने का रास्ता तलाश रहा था. उन्होंने कहा, ‘पंजशीर तालिबान से नहीं ल’ड़ सकता, तालिबान के पास भारी ताकत है.’ उन्होंने कहा, ‘यह 1980 नहीं है, तालिबान के पास मजबूत लड़ा’के हैं.’

इससे पहले उनका एक लेख वाशिंगटन पोस्ट में प्राकशित हुआ था जिसमे उन्होंने लिखा था की, ‘मैं आज पंजशीर घाटी से लिख रहा हूं, उन मु’जाहि’दीन लड़ा’कों के साथ अपने पिता के पदचिह्नों पर चलने के लिए तैयार हूं, जो एक बार फिर तालि’बान का सामना करने के लिए तैयार हैं.’ मसूद ने आगे लिखा था कि उनके बलों को अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत होगी. कहा जा रहा है कि उनकी सेना में 6000 से ज्यादा लड़ा’के हैं.

उन्होंने फ्रांस, यूरोप, अमेरीका और अरब देशों से मदद मांगी थी. मसूद ने कहा था कि इन्होंने सोवियत और तालि’बान के खिला’फ 20 साल पहले लड़’ने में उनके पिता की मदद की थी. मसूद के पिता ने पंजशीर में तालि’बान के खिला’फ सबसे बड़ा अभियान चलाया था. उनकी 2001 में हत्या कर दी गई थी. 1989 में तखार प्रांत के पियु में जन्में मसूद ने स्कूली शिक्षा ईरान में हासिल की थी और इसके बाद ब्रिटेन के रॉयल मिलिट्री एकेडमी सेंडहर्स्ट में एक साल से’ना का कोर्स किया था.

मसूद ने कहा था कि वे तालि’बान के साथ शांति वार्ता करना चाहते हैं और अफगानिस्तान में गृहयु’द्ध नहीं देखना चाहते. हालांकि, उन्होंने जरूरत पड़ने पर सामना करने की भी चेता’वनी दी थी. बीते हफ्ते स्थानीय सेना ने बागलान के उत्तरी प्रांत में बानो, देस सलेह, पुल ए हेसार को तालि’बान के नियंत्रण से मुक्त करा लिया था.

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