तुर्की ने हागिया सोफिया में उसमानियों की कस्तुनतुनिया पर जीत का जश्न मनाया

29 मई 1453 ईसवीं के दिन उस्मानियों ने इस्लाम को हसीनतरीन तोहफा दिया। ये दिन इस्लामी दुनिया की शानदार फातेह का दिन है। इसी दिन कांस्टेण्टिनोपोल यानी आज का इस्तांबुल उस्मानियों ने बीजंतीन सलीबियों से फतह किया था।

फतह करने वाले सुल्तान थे अरतुगरुल ग़ाज़ी की 7वीं पुश्त के 21 साल के पोते फातिह सुल्तान मुहम्मद। 21 साल का नौजवान बादशाह क़ुरआन का हाफ़िज़, फ़िक़ और हदीस का जानकार, गणित और खगोल का ज्ञाता। फातेह को 7 ज़बानें आती थीं।

जो कांस्टेण्टिनोपोल शहर ईसाई बीजंतीन कि 1000 साल से राजधानी थी, इस नौजवान ने 2 साल में जीत ली। अपने वालिद मुराद की मौत के बाद सिर्फ 19 साल की उम्र में इस नौजवान ने हुकूमत संभाली और 2 साल में कांस्टेण्टिनोपोल जीत लिया।

सुल्तान बनने के साथ ही इन्होंने नियम बना दिया था कि मुझसे सिवा कांस्टेण्टिनोपोल के किसी और मुद्दे पर बात न कि जाए, जब तक हम इसे फतेह न कर लें। कस्तुनतुनिया की विजय सिर्फ एक शहर पर एक राजा के शासन का खात्मा और दूसरे शासन का प्रारंभ नहीं था।

इस घटना के साथ ही दुनिया के इतिहास का एक अध्याय खत्म हुआ और दूसरा शुरू हुआ था। एक तरफ 27 ईसा पूर्व में स्थापित हुआ रोमन साम्राज्य 1480 साल तक किसी न किसी रूप में बने रहने के बाद अपने अंजाम तक पहुंचा। दूसरी ओर उस्मानी साम्राज्य ने अपना बुलंदियों को छुआ और वह अगली चार सदियों तक तक तीन महाद्वीपों, एशिया, यूरोप और अफ्रीका के एक बड़े हिस्से पर बड़ी शान से हुकूमत करता रहा।


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