कोरोना का टीका बना रही कंपनी को खरीदने की कोशिश में थे डोनाल्ड ट्रंप

द वेल्ट डेली ने शनिवार को बताया, यू.एस. और जर्मनी कोरोनोवायरस के खिलाफ एक विशेष वैक्सीन का निर्माण करने की कोशिश कर रहे हैं जिसे जर्मन प्रयोगशाला में विकसित किया जा रहा है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इसमे बड़ा फाइदा नजर आया और उन्होने इस कंपनी को खरीदने की कोशिश की।

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक जर्मन दवा कंपनी क्योर वेक ( CureVac) ने दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन ने उन्हें खरीदने की कोशिश की थी। कंपनी के मुताबिक न सिर्फ ट्रंप इस मुलाक़ात में शामिल रहे बल्कि उन्हें इस रिसर्च को अमेरिका शिफ्ट करने के लिए अच्छी-खासी रकम भी ऑफर की गई है।

क्योर वेक की चीफ एक्जीक्यूटिव डेनियल मेनिशेला ने बताया कि खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कुछ देर के लिए इस मीटिंग में शामिल हुए थे। ट्रंप के अलावा इस मीटिंग में उपराष्ट्रपति माइक पेंस भी मौजूद थे जिन्हें व्हाइट हाउस कोरोना वायरस टास्क फ़ोर्स की जिम्मेदारी दी गई ।

मेनिशेला ने कहा कि हमने उन्हें बताया था कि बस कुछ ही महीनों में हम कोरोना की वैक्सीन तैयार कर लेंगे। जर्मन अखबार Die Welt के मुताबिक ट्रंप ने वैक्सीन तक पहुंच के एक्सक्लूसिव राइट्स के लिए क्योर वेक को 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 7500 करोड़ रुपये देने का ऑफर दिया था। ट्रंप चाहते थे कि कोरोना की वैक्सीन सिर्फ और सिर्फ अमेरिका में ही बननी चाहिए।

हालांकि इस खबर के सामने आने के बाद जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने अपने कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई। जर्मनी सरकार में मिनिस्टर होर्स्ट सीहॉफर ने रविवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में इस बात की पुष्टि कर दी कि ट्रंप प्रशासन ने वैक्सीन खरीदने की कोशिश की है। सीहॉफर ने कहा कि हमें इसकी जानकारी है और सरकार इस मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है। जर्मन सरकार ने इस बात की भी पुष्टि की है कि कंपनी को एक बड़ी रकम ऑफर की गई थी


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