संयुक्त अरब अमीरात का मिशन मंगल हुआ लॉन्च, जापान से उपग्रह छोड़ा गया

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का पहला मार्स मिशन होप प्रोब जापान से एक रॉकेट पर सोमवार को लॉन्च किया गया।रॉकेट ने जापान के उपग्रह के साथ तनेगाशिमा स्पेस सेंटर से अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी।

यूएई की स्पेस एजेंसी का कहना है कि होप प्रोब सही तरीके से कार्य कर रही है और लॉन्चिंग के बाद से संकेत भेज रही है। वहीं संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने यूएई के इस मिशन की तारीफ करते हुए कहा है कि यूएई का मार्स मिशन पूरी दुनिया के लिए एक योगदान है।

संयुक्त राष्ट्र के अंतरिक्ष मामलों के कार्यालय की निदेशक सिमोनिटा डी पिप्पो ने कहा कि यूएई हमेशा भविष्य के लिए तत्पर है, यह हमारा अद्भुत साथी है। वियना से स्काइप पर दिए गए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, मैं होप प्रोब को लेकर उत्साहित हूं। इससे पता चलता है कि यूएई वास्तव में अंतरिक्ष क्षेत्र में एक मुख्य खिलाड़ी बन रहा है। होप प्रोब की लॉन्चिंग डी पिप्पो ने कहा, यह बेहद दिलचस्प है कि एक देश जिसके पास कुछ साल पहले तक एक अंतरिक्ष कार्यक्रम या एक अंतरिक्ष एजेंसी नहीं थी, अब मंगल ग्रह की जांच शुरू करने में सक्षम है।

यह उपग्रह  50 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय करके मंगल ग्रह के मौसम और जलवायु का अध्ययन करेगा। होप उपग्रह के फ़रवरी 2021 तक मंगल तक पहुंचने की संभावना है। अमरीकी विशेषज्ञों की निगरानी में यूएई के इंजीनियरों ने छह सालों की मेहनत के बाद एक परिष्कृत उपग्रह तैयार किया है।

बीबीसी के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात मंगल ग्रह पर पहुँचकर वो नहीं करना चाहता है जो जानकारी दूसरे देश पहले ही हासिल कर चुके हैं। इसके लिए वे अमरीका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा के पास गए। उन्होंने पूछा कि यूएई ऐसा क्या रिसर्च करे कि मौजूदा उपलब्ध जानकारी में इज़ाफ़ा हो सके।

ऐसे में अब संयुक्त अरब अमीरात का सैटेलाइट इस बात का अध्ययन करेगा कि वातावरण में ऊर्जा किस तरह से गति करती है। ऊपर से नीचे तक, दिन के पूरे वक्त और साल के सभी मौसमों में। ये सैटेलाइट मंगल पर फैली धूल का भी अध्ययन करेगा। इसी धूल के कारण मंगल का तापमान प्रभावित होता है।

मंगल के वातावरण में मौजूद हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के तटस्थ परमाणुओं के बर्ताव का भी ये सैटेलाइट अध्ययन करेगा। सूर्य से आने वाले ऊर्जा कण मंगल ग्रह पर पहुँचकर उसके क्षरण का कारण बनते हैं। ऐसी वैज्ञानिक मान्यता रही है कि अतीत में मंगल ग्रह पर पानी था। आख़िर उस पानी को क्या हुआ. होप मिशन की स्टडी के दायरे में ये विषय भी रहेगी।


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