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Sunday, December 5, 2021

देखिये ईरान का होर्मुज़ जज़ीराः रेनबो द्वीप जिसकी ख़ूबसूरती से अनजान है दुनिया

सुनहरी नहरें, सुर्ख साहिल समंदर और मोहक नमक की खदानों के साथ, ईरान का जज़ीरा होर्मुज़ जन्नत के नज़ारे पेश करता है.इसे ‘भूवैज्ञानिकों का डिज़्नीलैंड’ भी कहा जाता है.

हम दक्षिणी ईरान में होर्मुज द्वीप के तट पर एक लाल पहाड़ की तलहटी में खड़े थे, जब मेरे टूर गाइड फरज़ाद ने कहा, “आपको इस मिट्टी का स्वाद लेना चाहिए.” इस बुलंद पहाड़ की लाल छाया साहिल और पानी की लहरों को अपनी चपेट में ले रही थी.

मैंने घबराहट में इस सलाह पर अमल करने का सोचा लेकिन अभी भी उस रहस्यमयी और खनिज से भरे दृश्य को समझ नहीं पाया था.

ईरान के तट से आठ किलोमीटर दूर फारस की खाड़ी के नीले पानी के बीच में होर्मुज़ जज़ीरा आसमान से आंसू जैसा दिखता है.पहाड़ नमक के टीले हैं जिनमें विभिन्न पत्थर, मिट्टी और लोहे से भरपूर ज्वालामुखी की चट्टानें हैं जो लाल, पीले और नारंगी रंगों में चमकती हैं.

यहां 70 से अधिक तरह के खनिज पाए जाते हैं. 42 वर्ग किलोमीटर के इस द्वीप का हर इंच इसकी संरचना की कहानी कहता है.डॉक्टर कैथरीन गोडाईनोव ने अतीत में ईरान में काम किया है और अब वो ब्रिटिश भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के प्रधान भूविज्ञानी हैं.

उनके मुताबिक लाखों साल पहले फारस की खाड़ी में उथले समुद्रों ने नमक की मोटी परतों का निर्माण किया था. ये परतें खनिजों से भरी ज्वालामुखीय चट्टानों से टकराईं और उनके संयोजन ने एक रंगीन भूभाग का निर्माण किया.

डॉक्टर गोडाइनोव कहती हैं, “पिछले 50 करोड़ सालों के दौरान नमक की सतहें ज्वालामुखी की परतों में दब गईं.” चूंकि नमक पानी की सतह पर तैर सकता है इसलिए वक़्त के साथ ये नमक चट्टानों में मौजूद दरारों से बाहर निकलता रहा और इसने सतह पर पहुंच कर नमक के टीले बना लिए.

उनका कहना है कि फारस की खाड़ी के ज्यादातर हिस्सों में जमीन के नीचे नमक की मोटी परतें मौजूद हैं. इसी भौगोलिक प्रक्रिया ने सुनहरी धाराएँ, लाल समुद्र तट और मोहक नमक की खदानें बनाई हैं.

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