कतर और ईरान के साथ रिश्तों को लेकर सऊदी अरब ने दिया बड़ा बयान

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सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान ने कतर के साथ अपने देश के संबंधों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों पड़ोसियों के बीच संबंध “बहुत अच्छे” है। बिन फैसल ने कहा कि सऊदी शहर अल उला में हुए एक सुलह समझौते के जरिये दोनों पक्षों ने विवादों को सुलझा लिया है और खाड़ी सहयोग बढ़ाया है।

जनवरी में, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), बहरीन और मिस्र अल उला में खाड़ी शिखर सम्मेलन के दौरान कतर के साथ राजनयिक, व्यापार और यात्रा संबंधों को बहाल करने के लिए सहमत हुए। पिछले महीने ही सऊदी अरब ने सुलह के बाद मंसूर बिन खालिद बिन फरहान को दोहा में राज्य के पहले राजदूत के रूप में नामित किया।

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ईरान के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि तेहरान खाड़ी में समुद्री नौवहन के लिए खत’रा है और लेबनान में समस्या और संकट का हिस्सा है। हालाँकि, उन्होंने कहा, “हम क्षेत्र के उत्पादक हिस्से के रूप में ईरान का बहुत स्वागत करेंगे” यदि वह पूरे क्षेत्र में मिलि’शिया का समर्थन करना बंद कर देता है और अपने परमा’णु कार्यक्रम को छोड़ देता है।

बिन फरहान ने कहा कि रियाद 2015 के पर’माणु समझौते की तुलना में ईरान के साथ “लंबे और मजबूत” प’रमाणु समझौते के साथ जाएगा। उन्होंने कहा, “हम निश्चित रूप से ईरान के साथ एक समझौते का समर्थन करते हैं, जब तक कि यह सौदा सुनिश्चित करता है कि ईरान अभी या कभी भी परमा’णु हथि’यार प्रौद्योगिकी तक पहुंच हासिल नहीं करेगा।”

अब्राहम समझौते को लेकर उन्होने बिन फरहान ने कहा, “इज’रायल-फिलि’स्तीनी संघ’र्ष को स्थायी, दीर्घकालिक तरीके से हल किए बिना, हमारे पास इस क्षेत्र में वास्तविक स्थायी सुरक्षा नहीं होगी।”

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