तातार मुस्लिमों पर जुल्म कर रहा रूस, अपनाई “अमानवीय रणनीति”

क्रीमिया के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता ने बुधवार को रूसी अधिकारियों पर तातार मुस्लिमों के खिलाफ “अमानवीय रणनीति” का इस्तेमाल करने और उनके धार्मिक स्थलों का निशाना बनाने का आरोप लगाया।

इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक इस्लामाबाद इंस्टीट्यूट ऑफ कॉन्फ्लिक्ट रेजोल्यूशन (IICR) द्वारा आयोजित “क्रीमिया इज यूक्रेन” नामक एक ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, क्रीमिया के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता, लुत्फिये ज़ुडियावा ने कहा कि तातार मुस्लिम जातीय अल्पसंख्यक हैं। जिसे क्रीमिया में रूसी सेना द्वारा सताया गया।

उन्होने कहा, “उनमें से कई (क्रीमियन टाटर्स) ने खुले तौर पर रूस के आक्रमण का विरोध किया जो 2014 में शुरू हुआ, क्योंकि हमारे लोग हमारी मातृभूमि में अल्पसंख्यक बन गए थे।” उन्होने रूसी सेना पर सैकड़ों मुसलमानों को गिरफ्तार करने और उन्हें आतंकवाद के आरोपों में उनकी अदालतों के माध्यम से सजा देने का आरोप भी लगाया।

यूक्रेन की प्रथम उप विदेश मंत्री एमिन द्झापरोवा ने सम्मेलन में कहा कि क्रीमिया में मानवाधिकारों के उल्लंघन की स्थिति उनके देश के लिए गहरी चिंता का विषय है। उन्होने कहा, “यदि आप सार्वजनिक रूप से यह कहने की हिम्मत करते हैं कि क्रीमिया यूक्रेन है, तो आपको कम से कम पांच साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। हम क्रीमिया को एक सैन्य अड्डा (रूस का) कहते हैं।”

यूक्रेन के मंत्री ने कहा, “यूक्रेन के नागरिकों को दबाकर रूस अधिक से अधिक नए लोगों को लाने की कोशिश कर रहा है, और कम से कम आधा मिलियन रूसी नागरिक पहले ही क्रीमिया प्रायद्वीप में चले गए हैं।”