पुतिन ने लगाई पश्चिम देशों को लताड़ – अफगानिस्तान में सबक मिलने पर भी नहीं सुधर रहे

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अफगानिस्तान में तालिबान को लेकर नरम रुख अपनाया हुआ है। इसी के साथ वह पश्चिमी देशों को भी लताड़ रहे है। अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनि’कों की वापसी पर उन्होने कहा, अफ़ग़ानिस्तान में सबक मिलने के बाद भी पश्चिमी देश दूसरे देशों पर अपनी चीज़ें थोपना बंद नहीं कर रहे हैं।

उन्होने कहा, “क्या ये पश्चिम के प्रभुत्व का अंत है? आख़िर मसला क्या है? मसला ये है कि ये सबक़ मौजूद हैं और इन्हें सही तरीक़े से समझकर नीति में बदलाव लाया जाना चाहिए।”

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पुतिन ने कहा, ”वे अफ़ग़ानिस्तान के बारे में कहते हैं कि हम वहाँ गए और हमने वहां कई ग़लतियां कीं। लेकिन वे लगातार दूसरे देशों के मामले में यही ग़लतियां करते आ रहे हैं। इन प्रतिबंधों का क्या अर्थ है? ये उसी नीति के तहत हो रहा है, जिसके तहत वे दूसरे देशों पर अपने मानक थोपते हैं।”

समाचार एजेंसी स्पूतनिक की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम की बैठक में कहा, तालिबान असल में पश्तून आदिवासियों का समूह है, जबकि अफगानिस्तान में इ’स्लामिक स्टेट सहित तमाम कट्ट’रपंथी समूह मौजूद हैं। ऐसे में वहां कोई एक इस तरह का समूह नहीं जिससे किसी मसले पर बातचीत कर ठोस नतीजे निकाले जा सकें।

उन्होने कहा, “रूस की अफगानिस्तान के टुकड़े करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। अगर ऐसा होता है, तो बात करने वाला कोई नहीं होगा।” उन्होंने कहा, “तालिबान जितनी जल्दी सभ्य लोगों के परिवार में प्रवेश करेगा, उतना ही बोलना, संपर्क करना, संवाद करना और किसी तरह प्रभावित करना और सवाल पूछना आसान होगा।”

पुतिन ने कहा, “अमेरिकियों ने, बहुत व्यावहारिक लोगों ने, इस अभियान पर पिछले कुछ वर्षों में $1.5 ट्रिलियन से अधिक खर्च किया, और इसका परिणाम क्या है? शून्य। यदि आप अफगानिस्तान में छोड़े गए लोगों की संख्या को देखें, (जो) सामूहिक पश्चिम, अमेरिका और उनके सहयोगियों के लिए काम कर रहे हैं, तो यह भी एक मानवीय आपदा है।

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