आज ही के दिन उस्मानियों ने जीता था क़ुस्तुंतुनिया, हुजूर ने पहले ही कर दी थी पेशीनगोई

29 मई, साल 1453 की तारीख इस्लामिक इतिहास की एक अजीम तारीख है। आज ही के दिन सल्तनत ए उस्मानिया के दिलेरों ने क़ुस्तुंतुनिया पर जीत हासिल की थी। जिसकी पेशीनगोई (अनुमान) खूद पैगंबर ए इस्लाम ने की थी। क़ुस्तुंतुनिया को आज इस्तांबुल के नाम से जाना जाता है। जो तुर्की का एक बड़ा और खास शहर है।

21 साल के उस्मानी सुल्तान मोहम्मद सानी के नेतृत्व में ये जीत हासिल की गई थी। इससे पहले क़ुस्तुंतुनिया पर बांजिटिनी का शासन था। क़ुस्तुंतुनिया की जीत के साथ 27 ईसा पूर्व में स्थापित हुए रोमन साम्राज्य का अंत आ गया था। वहीं सल्तनत ए उस्मानिया अपने उरुज पर पहुंच गई थी।

सल्तनत ए उस्मानिया ने अगली चार सदियों तक तीन महाद्वीपों, एशिया, यूरोप और अफ्रीका के एक बड़े हिस्से पर बड़ी शान से राज किया। सुल्तान मोहम्मद सानी को आज दुनिया सुल्तान मोहम्मद फातेह के नाम से जानती है। तुर्की में हर साल इस जीत का जश्न मनाया जाता है।

इस बार इस्तांबुल की विजय की 568वीं वर्षगांठ तुर्की महानगर में एक दृश्य शो के साथ मनाई गई है। तुर्की के संचार निदेशालय ने इस्तांबुल की विजय की वर्षगांठ को चिह्नित करने के लिए संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से एक दृश्य दावत का आयोजन किया जिसने इतिहास के पाठ्यक्रम को बदल दिया।

हागिया सोफिया ग्रैंड मस्जिद में कुरान के 48 वें अध्याय के पाठ के बाद, गलाटा टॉवर और हागिया सोफिया में एक विशेष आभासी प्रक्षेपण मानचित्रण शो के साथ समारोह जारी रहा।