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Thursday, October 21, 2021

प्रवासियों के साथ दुर्व्य’वहार को लेकर भड़के नोबेल विजेता अब्दुलराजाक गुरनाह

नोबेल साहित्य पुरस्कार विजेता अब्दुलराजाक गुरनाह ने ब्रिटेन सहित उन सभी सरकारों की “करुणा की कमी” की आलोचना की, जो प्रवासियों को एक समस्या या खत’रे के रूप में मानते हैं।

गुरना ज़ांज़ीबार द्वीप पर पले-बढ़े, जो अब तंजानिया का हिस्सा है, और 1960 के दशक में एक 18 वर्षीय शरणार्थी के रूप में इंग्लैंड पहुंचे। उन्होंने 10 उपन्यास लिखे है, जिनमें “मेमोरी ऑफ डिपार्चर,” “पिलग्रिम्स वे,” “आफ्टरलाइव्स” और बुकर प्राइज फाइनलिस्ट “पैराडाइज” शामिल हैं।

गुरनाह ने कहा कि पलायन “सिर्फ मेरी कहानी नहीं है… यह हमारे समय की घटना है।” 72 वर्षीय उपन्यासकार ने कहा कि अपनी मातृभूमि छोड़ने के बाद के दशकों में प्रवासियों के सामने आने वाली परेशानी कम नहीं हुई है।

पुरस्कार जीतने के एक दिन बाद गुरना ने संवाददाताओं से कहा, “ऐसा लग सकता है कि चीजें आगे बढ़ गई हैं, लेकिन एक बार फिर आपको नई आवक, वही पुरानी दवा मिल रही है।”

“अखबारों में वही पुरानी कुरू’पता, बद’सलूकी, सरकार में क’रुणा की कमी।”

गुरनाह ने कहा कि ब्रिटेन दशकों से न’स्लवाद के बारे में अधिक जागरूक हो गया है और उसने अपने शाही अतीत की चर्चा “तेज” की है। लेकिन “संस्थाएं, मुझे ऐसा लगता है, उतनी ही मतलबी हैं, उतनी ही सत्तावादी हैं जितनी वे थीं।”

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