इज़राइल ने अल-अक्सा मस्जिद में यहूदी प्रार्थना की दी अनुमति, पूरे देश में में बढ़ा तनाव

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Israel allowed Jewish prayer in Al-Aqsa Mosque, outrage across the country, condemning this decision everywhere

यरूशलेम के पुराने शहर में मुस्लिम स्थल अल-अक्सा मस्जिद में विशिष्ट यहूदी प्रार्थनाओं की अनुमति देने के यरुशलम मजिस्ट्रेट की अदालत के फैसले की देश और विदेश में कड़ी निंदा की गई है और इसको लेकर परिणामों के बारे में सख्त चेतावनी दी गई है।

अपने बयान के अनुसार, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति ने अल-अक्सा मस्जिद और डोम ऑफ द रॉक सहित अल-हरम अल-शरीफ परिसर में मौजूदा ऐतिहासिक यथास्थिति के गंभीर उल्लंघन के रूप में इजरायली अदालत के फैसले की निंदा की है, और अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का खुला उल्लंघन बताया है।

इस तरह के फैसले के बाद सिर्फ फिलिस्तीन ही नहीं बल्कि दुनिया के ज़्यादातर देशो ने इसकी कड़ी निंदा की है

इसके साथ ही राष्ट्रपति ने 29 मई को कब्जे वाले यरुशलम में उत्तेजक इजरायली “फ्लैग मार्च” की अनुमति देने के खिलाफ भी चेतावनी दी है।

इसके साथ ही राष्ट्रपति ने अमेरिकी प्रशासन से फिलिस्तीनी लोगों और उनके पाक जगहों पर इजरायल के हम’लों को रोकने के लिए तुरंत कोई एक्शन लेने का आह्वान किया है।

इसमें फिलिस्तीनी लोगों से इन हम’लों का सामना करने का भी आह्वान किया गया है और इस बात पर जोर देते हुए कि यरूशलेम, अपने ईसाई और मुस्लिम नागरिकों और उनके पाक जगहों के साथ, फिलिस्तीन राज्य की शाश्वत राजधानी बनी रहेगी। भले ही इजरायल जितने भी हम’ले करता रहे।

इसी तरह, विदेशी मामलों के मंत्रालय और फिलिस्तीनी प्राधिकरण के प्रवासियों ने मजिस्ट्रेट के न्यायालय के फैसले की कड़ी निंदा की है, जिसमें यहूदी चरमपंथियों को मुस्लिम पाक जगह में प्रार्थना करने और अनुष्ठान करने की इजाजत दी गई है.

इसे इजरायली तख्तापलट की एक स्पष्ट घोषणा कहा गया है। पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की भी धम’की दी गयी है।

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