कैलाश मानसरोवर के लिए बनाई सड़क को लेकर भड़का नेपाल, राजदूत को किया समन

कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए भारत की और से बनाई गई पिथौरागढ़ से लिपुलेख पास तक जाने वाली सड़क का रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को उद्घाटन किया था। इस सड़क के विरोध में नेपाल ने भारत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

नेपाल ने लिपुलेख तक सड़क निर्माण और कालापानी के मामले में हाल ही में काठमांडू में भारतीय राजदूत को तलब किया और कड़ी आपत्ति जताई है। इसके साथ ही नेपाल ने बुधवार को गर्बाधार-लिपुलेख सड़क को अतिक्रमण बता विवादित कालापानी क्षेत्र में सशस्त्र प्रहरी बल का बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) स्थापित कर दिया।

बीओपी पर जवानों को तैनात करने के लिए नेपाली सेना के हेलीकॉप्टर एम-16 का प्रयोग किया गया। दल के साथ नेपाली गृह मंत्री रामबहादुर थापा के सुरक्षा सलाहकार इंद्रजीत राई के साथ ही 12 अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। मामले में पिथौरागढ़ के डीएएम डॉ. वीके जोगदंडे ने बताया कि छांगरु में नेपाल सशत्र बल के बीओपी खुलने की अभी एसएसबी से सूचना नहीं मिली है। प्रशासन पूरे मामले में नजर रखे हुए है। जरूरत पड़ी तो रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी।

नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने काठमांडू से इंडिया टुडे टीवी से विशेष बातचीत करते हुए कहा कि वे कभी भी इसके आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होने देंगे। नेपाल ने इसका विरोध करते हुए तीन दिन बाद काठमांडू में भारतीय राजदूत विनय मोहन को तलब कर डिप्लोमेटिक नोट सौंपा।

नेपाल द्विपक्षीय बातचीत चाहता है। भारत ने कहा है कि जमीन हमारी है।  इससे पहले अनुच्छेद 370 कि बाद जब भारत ने नक्शा पास किया था जिसमें लिपुलेख पास को भारत में दिखाया गया था तो भी नेपाल ने इसका विरोध किया था और आपत्ति जताई थी।

भारत-नेपाल संबंधों के जानकार रिटायर्ड मेजर बीएस रौतेला ने बताया कि नेपाल का उद्देश्य गर्बाधार-लिपुलेख मार्ग की निगरानी है। हालांकि इससे हमारी तैयारी प्रभावित होने वाली नहीं। नेपाल मित्र राष्ट्र है, लेकिन उसकी हाल की गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं कर सकते।


    देश के अच्छे तथा सभ्य परिवारों में रिश्ता देखें - Register FREE