ग्रीक की अदालत ने चुने हुए मुफ्ती को सुना दी 15 महीने की जे’ल की स’जा, ये है वजह

ग्रीस की और से अल्पसंख्यक मुस्लिमों को दबाने का एक और स्पष्ट प्रयास किया गया। जिसमे ग्रीक अदालत ने गुरुवार को ज़ांथी के निर्वाचित मुफ्ती (मुस्लिम अधिकारी) को 15 महीने की जे’ल की सजा सुना दी है।

थेसालोनिकी में एक आप’राधिक अदालत ने अहमत मेटे को स’जा तीन साल की मोहलत के साथ, कथित तौर पर “सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने” के लिए सुनाई गई है। न्यायाधीश के फैसले के अनुसार, यदि वह अगले तीन वर्षों के भीतर कोई अप’राध करता है, तो वह अपनी स’जा पूरी करने के लिए जेल जाएंगे।

ज़ांथी मुफ्ती के कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि मेटे ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है, जिसमें कहा गया है कि इस फैसले के खिलाफ उनके वकीलों के माध्यम से अपील की जाएगी। ज़ांथी (इस्केस) ग्रीस के पश्चिमी थ्रेस क्षेत्र का हिस्सा है, जिसकी आबादी 150,000 मुस्लिम तुर्क है। जो सदियों से रह रही है।

ग्रीस में मुसलमानों द्वारा मुफ्ती, या इस्लामी मौलवियों के चुनाव को 1913 में एथेंस की संधि, ग्रीक-ओटोमन साम्राज्य संधि द्वारा नियंत्रित किया जाता है, जिसे एथेंस द्वारा 1920 में लागू किया गया था।

हालांकि 1991 में, अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए, ग्रीस ने 1913 की संधि के संबंध में अपने कानून को रद्द कर दिया और अवैध रूप से मुफ्तियों को ही नियुक्त करना शुरू कर दिया। ग्रीक ने नियुक्त मुफ्तियों से स्थानीय मुसलमानों के परिवार और विरासत के मामलों पर अधिकार क्षेत्र का अधिकार भी छीन लिया है।

पश्चिमी थ्रेस में अधिकांश मुस्लिम तुर्क ग्रीक राज्य द्वारा नियुक्त मुफ्तियों को मान्यता नहीं देते हैं और इसके बजाय अपने मुफ्तियों को सही तरीके से चुनते हैं। हालांकि, 1991 के बाद से ग्रीक राज्य ने निर्वाचित मुफ्तियों को मान्यता देने से इनकार कर दिया है, और अधिकारियों ने मौलवियों पर मुकदमा भी चलाया है।