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Saturday, May 21, 2022

यूक्रेन से भारत आये 18000 से अधिक मेडिकल छात्रों का भविष्य खतरे में

यूक्रेन से 18,000 से अधिक मेडिकल के भारतीय छात्र वापस आये है, जिन्हें युद्ध शुरू होने के बाद निकाला गया था। लेकिन अब समस्या ये है की उन भारतीय मेडिकल छात्रों के भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है क्योकि अपनी पढ़ाई को पूरा करने के लिए अब भारतीय कॉलेज में जगह पाने में असमर्थ है।

रूस और यूक्रेन की युद्ध के चलते बहुत से भारतीय छात्र वहा से वापस आये है हजारों युवा भारतीय चाहते है की वो डॉक्टर बने और इन्ही भारतीयों के लिए डॉक्टर बनने का सपना छोटे शहरों और गांवों से शुरू होता है। लेकिन सरकारी किफायती कॉलेजों में उपलब्ध रिक्तियों की संख्या हमेशा उम्मीदवारों से अधिक रही है वही प्राइवेट मेडिकल कॉलेज केवल उन्हीं के लिए उपलब्ध हैं जो बहुत अधिक शुल्क वहन कर सकते हैं।

2021 में, 1.5 मिलियन से अधिक छात्र सरकारी कॉलेजों में योग्यता परीक्षा के लिए उपस्थित हुए, लेकिन 6% से कम ने प्रवेश पाने में कामयाबी हासिल की। पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया, के अनुसार, 2014 में हर 11 उम्मीदवारों में से केवल एक ही मेडिकल कॉलेजों में शामिल हुआ। पिछले साल यह संख्या बढ़कर 19 उम्मीदवारों में से एक हो गई थी।

फाउंडेशन के अध्यक्ष के. श्रीनाथ रेड्डी कहते हैं, “छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई है , लेकिन सीटों में वृद्धि नहीं हुई है। जिसके चलते, बड़ी संख्या में छात्र बाहरी रास्ते तलाशने लगते हैं।”

इसी तरह एक किसान का बेटा, कुमार न केवल परिवार में, बल्कि अपने पूरे गाँव में पहला डॉक्टर बनने के लिए पढ़ाई कर रहा था। चूंकि उन्हें सरकारी कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल सका, इसलिए यूक्रेन जाना अगला किफायती विकल्प था।

वो कहते “मुझे एक प्राइवेट भारतीय मेडिकल कॉलेज में लगभग 150,000 डॉलर (£113,000) का भुगतान करना पड़ता था, लेकिन यूक्रेन में पूरे छह साल के पाठ्यक्रम के लिए मुझे लगभग 30,000 डॉलर का खर्च करना पड़ा। [फिर भी] मैंने एक बड़ा लोन लिया और मेरे पिता को हमारी पुश्तैनी ज़मीन बेचनी पड़ी।

वो आगे कहते है अब जब यूक्रेन से छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर लौट रहे हैं तो बहुत ही ज़्यादा कन्फूज़ है। वो कहते है “मुझे चिंता है, डिग्री के बिना, मैं भारत में योग्यता परीक्षा नहीं दे सकता। अगर मेरे पास डिग्री नहीं है तो मैं अपना आवेदन कैसे भर सकता हूं?

वही कुछ का मानना ​​है कि सरकार को यूक्रेन के छात्रों को स्थानीय मेडिकल कॉलेजों में एडजस्ट करने की अनुमति देनी चाहिए। सरकार ने कहा है कि वह उनके मामले को देख रही है।

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