चीन और रूस आये सऊदी के साथ , अमेरिका के छूटे पसीने, जानिये क्राउन प्रिंस कैसे दिखा रहे जो बाइडन को अपना पावर

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पिछले साल जब जो बाइडन अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे उसके बाद ही उन्होंने दुनियाभर के नेताओं से बातचीत करना शुरू किया था जिसमें कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और भारत के राष्ट्र प्रमुख थे.लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि उन्होंने सऊदी अरब के प्रिंस बिन सलमान से बातचीत क्यों नहीं की तो उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि वह सऊदी अरब के प्रमुख नहीं हैं.

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पिछले कुछ महीनों से क्राउन प्रिंस बिन सलमान से बातचीत करने की कोशिश कर रहे है लेकिन वो उनका फोन नहीं उठा रहे है अब हम आपको बताते है की क्राउन प्रिंस बिन सलमान किस तरह अमेरिका को अपनी पावर दिखा रहे है।

दरअसल मामला ये है की तीन महीने पहले अमेरिका के खुफिया एजेंसी के प्रमुख विलियन बर्न्स ने सऊदी अरब का दौरा किया था और इसी बीच उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात की थी जिसके बाद इस गुरुवार को तेल उत्पादक देशों ओपेक प्लस की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये एक हम बैठक हुई थी।

जिसमें ओपेक+ बैठक ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया, कि ‘तेल-बाजार के बुनियादी सिद्धांतों और दृष्टिकोण पर आम सहमति एक स्टेबल और अच्छे बाजार की ओर इशारा करती है’ इसका मतलब ये है की सीआईए प्रमुख जिन मांगों के लिए सऊदी अरब पहुंचे थे, उन मांगों के बारे में सऊदी अरब ने एक बार भी सोचा तक नहीं। इसके साथ ही तेल उत्पादक देशों की बैठक में ये भी फैसला लिया गया, कि कच्चे तेल का प्रोडक्शन नहीं बढ़ाया जाएगा, जो अमेरिका के लिए बहुत बड़ा झटका है और इसके साथ ही रूस को बहुत बड़ी मदद, जिसका फैसला प्रिंस बिन सलमान ने लिया।

इसके साथ ही अब प्रिंस सलमान से ये अनुरोध करने कि ‘उत्पादन बढ़ाने के लिए एक नई तेल-सुरक्षा-सुरक्षा रणनीति पर सहयोग करना चाहिए और यूरोपीय देशों को इस ऊर्जा की कमी से बचाएं।” लेकिन, प्रिंस सलमान ने सीआईए डायरेक्टर की बातों को मानने से साफ़ इनकार कर दिया।

इसके साथ ही अमेरिका को एक झटका तब और लगा जब ईरान और सऊदी के रिश्तो में सुधर आने लगा दरअसल सऊदी अरब ईरान के साथ अपने रिश्ते सुधार रहा है और अमेरिका को उसने पूरी तरह से कोने कर दिया है, यहां तक की अब सलाह-मशविरा भी नहीं।

इतना ही नहीं अमेरिका के लिए एक बड़ी मुसीबत ये भी है की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सऊदी अरब का दौरा होने वाला है और बाइडेन प्रशासन को शी जिनपिंग का सऊदी दौरा सबसे ज्यादा परेशान करने वाला है. इसके अलावा क्राउन प्रिंस ने रूस के खिलाफ जाने से भी इंकार कर दिया है जो अमेरिका को परेशान करने के लिए काफी है.

सऊदी में अभी क्राउन प्रिंस बिन सलमान ही अगर आकर शासन करने वाले और इसके साथ अब सऊदी अपने आपको और पावर में लाने के लिए बेस तैयार कर रहा है जिसका नेत्तृत्व प्रिंस बिन सलमान ही करेंगे और उन्होंने विजन २०३० लांच करके ये साबित कर दिया है इससे देश को कई तरह से मज़बूती मिलेगी और सऊदी के युवाओ को बेहतरीन तरह से ट्रेन किया जाएगा।

इतना ही नहीं खुद को पावर में लाने के लिए सऊदी विजन 2030 के साथ अब परमाणु टेक्नोलॉजी की तरफ भी सऊदी बढ़ रहा है और सऊदी अरब बहुत जल्द स्पेस प्रोग्राम भी लांच करने वाला है, ताकि आने वाले समय में वो स्पेस टेक्नोलॉजी में भी पीछे ना रहेऔर प्रिंस सलमान की वजह से ही सऊदी अरब के 70 साल के उम्र के लोग और 35 साल की उम्र के लोगों की जीवनशैली में बहुत बड़ा बदलाव आ गया है जिसकी दुनिया भर में वाहवाही हो रही है।

 

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