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‘डील ऑफ़ सेंचुरी’ अमेरिका का बिछाया जाल, फंस चुके है अरब देश: इमाम ए अकसा

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अमेरिका की डील ऑफ़ सैंच्यूरी को जॉर्डन, मिस्र, सऊदी अरब, क़तर ने अपनी सहमति दे दी है। ऐसे मे अब मस्जिदुल अक़सा के इमाम शेख़ अकरमा सबरी ने कहा कि डील ऑफ़ सैंच्यूरी पर अपनी सहमति देकर अरब देश अमेरिका के जाल मे फंस गए है।

उन्होने डील ऑफ़ सैंच्यूरी को अमेरिका की इस सदी की सबसे बड़ी साजिश करार देते हुए कहा कि इसमें बैतुल मुक़द्दस को हर प्रकार की वार्त से अलग रखा गया है। साथ ही इसमे बेघर फ़िलिस्तीनियों की घर वापसी के विषय को ही ख़त्म करना है।

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इमाम ए अकसा ने कहा कि अपने घरों को वापसी फ़िलिस्तीनियों का मूल अधिकार है और फ़िलिस्तीनी शरणार्थी अपने इस अधिकार से किसी भी क़ीमत पर समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, इस डील के तहत ज़ायोनियों की अवैध बस्तियों को बाक़ी रखने की बात कही गई। जो गैरकानूनी है। जिन्हें कभी कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती।

बता दें कि फिलहाल डील आफ़ सेंचुरी के बारे में अभी कोई औपचारिक घोषणा तो नहीं की गई है। लेकिन इस डील में मिस्र और जार्डन की भी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। इस डील के तहत ग़ज़्ज़ा पट्टी के इलाक़े को पश्चिमी तट के इलाक़े से पूरी तरह अलग कर दिया जाएगा।

इस डील के तहत ग़ज़्ज़ा पट्टी के इलाक़े को पश्चिमी तट के इलाक़े से पूरी तरह अलग कर दिया जाएगा। ग़ज़्ज़ा वासियों के लिए पीने के पानी, बिजली, अन्य देशों की यात्रा की सुवधा, बंदरगाह और एयरपोर्ट का बंदोबस्त किया जाएगा।

यही काम ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर उत्तरी आयरलैंड में कर चुके हैं। उन्होंने इस क्षेत्र में ठोस राजनैतिक समाधान देने के बजाए आर्थिक व अन्य सुविधाएं देकर मामले को दबा दिया था। ग़ज़्ज़ा के मामले में यह पैसा सऊदी अरब और इमारात से अदा करवाया जाएगा और यह रक़म एक अरब डालर के आस पास बताई जाती है।

ग़ज़्ज़ा के लिए जो बिजली सप्लाई की जाएगी उसका केन्द्र मिस्र के भीतर बनाया जाएगा। ग़ज़्ज़ा के लिए जो एयरपोर्ट बनाया जाएगा उसका संचालन भी मिस्र के हाथ में रहेगा इसी तरह गज़्ज़ा के लिए जो बंदरगाह बनाई जाएगी उसे भी मिस्र के नियंत्रण में दिय जाएगा ताकि कोई भी ग़ज़्जा की यात्रा करना चाहे तो पहले वह मिस्र से इसकी अनुमति हासिल करें।

पश्चिमी तट के बारे में यह योजना बनाई गई है कि इस्राईल क़ब्ज़े से इसका जो हिस्सा बचा रह गया है उसे जार्डन के हवाले कर दिया जाएगा जो इस क्षेत्र को फ़ेडरल सिस्टम के आधार पर चलाएगा। इसका मतलब यह है कि फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना की योजना पर पूरी तरह पानी फेर देने की कोशिश हो रही है तथा बैतुल मुक़द्दस को पूरी तरह इस्राईल को सौंप दिया जाएगा।

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