अमेरिका और तालिबान में हुआ समझौता, 14 महीने में US फोर्स को छोड़ना होगा अफगानिस्तान

कतर के दोहा में शनिवार को अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो गए। जिसके बाद अब अमेरिका की फोज को 14 माह के भीतर अफगानिस्तान छोड़ना होगा। लगभग 30 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विदेश मंत्री और प्रतिनिधि अमेरिका-तालिबान शांति समझौते पर हस्ताक्षर के गवाह बने। जिसमे भारत भी शामिल है।

दोहा के एक आलीशान होटल में तालिबान के वार्ताकार मुल्ला बिरादर ने समझौते पर हस्ताक्षर किए वहीं दूसरी ओर से अमेरिका के वार्ताकार जलमय खलीलजाद ने हस्ताक्षर किए। इसके बाद दोनों ने हाथ मिलाए। इस दौरान होटल के कांफ्रेंस कक्ष में लोगों ने ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे लगाए।

यदि तालिबान समझौते का पालन करता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश अफगानिस्तान से 14 माह के भीतर अपने बलों को वापस बुला लेंगे। नाटो के महासचिव जेन्स स्टोल्टनबर्ग ने समझौते को स्थाई शांति की दिशा में पहला कदम करार दिया। नाव्रे के प्रधानमंत्री ने काबुल में कहा, शांति का रास्ता लंबा और कठिन है। हमें रुकावटों, विघ्न डालने वालों के लिए तैयार होना होगा,शांति का रास्ता आसान नहीं है।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को तालिबान के साथ हुए समझौते की तारीफ करते हुए कहा कि वह जल्द ही तालिबानी नेताओं से व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि तालिबान शांति के लिए तैयार है।

इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने तालिबान को चेता’वनी दी कि अगर चीजें खराब हुईं, तो हम फिर वापस जाएंगे। वहीं दोहा में अमेरिकी रक्षा मंत्री ने भी कहा था कि अगर तालिबान अपने वादे से पीछे हटा तो अमेरिका करार खत्म कर देगा। विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा, ‘हम इसकी करीब से निगरानी करेंगे कि तालिबान अपने वादों को लागू करता है या नहीं।  इसके साथ ही हम अफगानिस्तान से अमेरिकी सैन्य बलों को निकालने का फैसला लेंग।

भारत ने समझौते का किया स्वागत
भारत ने कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और तालिबान के बीच हुए शांति समझौते एवं काबुल में अफगानिस्तान तथा अमेरिका की सरकारों की संयुक्त घोषणा का शनिवार को स्वागत किया। साथ ही कहा है कि भारत की नीति अफगानिस्तान में शांति, सुरक्षा और स्थितरता लाने वाले सभी अवसरों का समर्थन करना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने यहां मीडिया से कहा, भारत की नीति अफगानिस्तान में शांति, सुरक्षा और स्थितरता लाने वाले सभी अवसरों का समर्थन करना है।


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