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Thursday, October 21, 2021

41% घट गया विश्व की सबसे असरदार कोरोना वैक्सीन का असर, डेल्टा वैरिएंट की चपेट में….

कोरोना महामारी से निपटने के लिए टीकाकरण को दुनिया भर में एक कारगर हथि’यार के रूप में इस्तेमाल की गया। लेकिन उसकी मा’रक क्षमता पिछले 6 महीनों में घटकर 47 फीसदी रह गई। यानि बीते 6 महीनों में कोरोना वैक्सीन का असर 41% घट गया।

एक स्टडी में सामने आया कि फाइजर-बायोएनटेक की दोनों खुराक लेने के बाद जो टीका संक्रमण रोकने में 88 फीसदी प्रभावी था, वह छह महीने बाद घटकर 47 फीसदी हो गया। इस स्टडी को लांसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया।

फाइजर की रिसर्च में सामने आया कि वैक्सीन का असर दूसरे डोज के करीब छह महीनों बाद 50 फीसद कम हो जाता है। टीकाकरण पूरा कर लेने के बाद पहले महीने में वैक्सीन 88 फीसद प्रभावी थी लेकिन करीब छह महीनों बाद प्रभावशीलता 47 फीसद घट गई।

फाइजर वैक्सीन्स में चीफ मेडिकल ऑफिसर और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट लुई जोडार ने कहा कि हमारा वेरिएंट स्पेसिफिक एनालिसिस बताता है कि फाइजर वैक्सीन कोरोना के डेल्टा समेत सभी चिंताजनक वेरिंएट के खिलाफ प्रभावी है।

डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ फाइजर वैक्सीन टीकाकरण के एक महीने तक 93 फीसद तक असरदार है, चार महीने में कम होकर इसका असर 53 फीसद हो गया, जबकि अन्य वैरिएंट के खिलाफ इसकी प्रभावकारिता 97 फीसद से घटकर 67 फीसद है। इसी बीच यूरोपियन यूनियन (European Union) के ड्रग वॉचडॉग ने सोमवार को 18 साल और उससे अधिक उम्र के सभी लोगों के लिए फाइजर/बायोएनटेक की कोविड वैक्सीन की बूस्टर डोज लगाने की मंजूरी दे दी।

EMA ने फाइजर वैक्सीन के ब्रांड नाम का जिक्र करते हुए एक बयान में कहा, ’18 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए दूसरी डोज के कम से कम छह महीने बाद कॉमिरनेटी बूस्टर डोज पर विचार किया जा सकता है। बूस्टर के लिए निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य निकायों द्वारा लिया जाएगा।’

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