रवीश कुमार: क्यों बाकी देश वेंटिलेटर वेंटिलेटर कर रहे हैं, भारत क्यों नहीं?

रवीश कुमार

“Its ventilators, ventilators, ventilators. That’s is the greatest need.”

यह बयान न्यूयार्क के गवर्नर एंड्र्यू क्यूमो का है। जो हर प्रेस कांफ्रेंस में वेंटिलेटर की आवश्यकता पर ज़ोर देते हैं। गवर्नर ने न्यूयार्क स्टेट के हर स्टोर से कहा है कि आपके पास अगर वेंटिलेटर है तो दीजिए। लोकल बिजनेस मैन से कहा है कि अगर आप वेंटिलेटर बना सकते हैं तो बनाइये। देखिए आपकी इंजीनियरिंग में वो क्षमता है या नहीं। इस वक्त वेंटिलेटर की औकात वो है जो द्वितीय विश्व युद्ध में मिसाइल की थी।

गवर्नर ने ट्विट भी किया है कि आने वाले दिनों में न्यूयार्क में वेंटिलेटर कम पड़ जाएंगे। न्यूयार्क में 5000-6000 वेंटिलेटर हैं। न्यूयार्क स्टेट की आबादी 1 करोड़ 80 लाख के करीब है। कोरोना के संक्रमण की रफ्तार को देखते हुए गवर्नर का मानना है कि 30,000 वेंटिलेटर की ज़रूरत होगी। यह तब है कि जब न्यूयार्क में कोरोना के 10,300 मामले सामने आए हैं। न्यूयार्क में 21 मार्च की रिपोर्ट के अनुसार 45000 सैंपल टेस्ट हो चुके हैं।

भारत में अभी तक 190000 सैंपल भी टेस्ट नहीं हुए हैं। 400 केस की पुष्टि भी नहीं हुई है। कारण है कि भारत कम सैंपल टेस्टिंग कर रहा है। भारत पिछले हफ्ते तक 5000 सैंपल टेस्ट कर रहा था जो अब एक दिन में 10,000 सैंपल टेस्ट करने का दावा कर रहा है। भारत की रणनीति है कि उन्हीं का टेस्ट हो जिनके लक्षण दिखते हैं। कोरोना से संक्रमित 5 प्रतिशत मरीज़ को ही अस्पताल में भर्ती की ज़रूरत है।

इन आंकड़ों से आप अमरीका के एक राज्य न्यूयार्क और पूरे भारत में कोरोना की तैयारी का आंकलन बहुत हद तक कर सकते हैं। जहां 10,300 केस कंफर्म होने पर न्यूयार्क कह रहा है कि वेंटिलेटर कम पड़ जाएंगे भारत के ICMR के चीफ कह रहे हैं कि 5 प्रतिशत मरीज़ को ही अस्पताल में भर्ती करने की ज़रूरत है। भारत की आबादी 1 अरब 35 करोड़ है। न्यूयार्क के हिसाब से भारत में 5 लाख से अधिक वेंटिलेटर होने चाहिए थे। मगर मीडिया में अधिक से अधिक संख्या 30,000 ही दिखी।

इंडियन एक्सप्रेस की अबंतिका घोष की रिपोर्ट में भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय का आंकड़ा बता रहा है कि 84,000 भारतीयों पर एक आइसोलेशन बेड है जहां कोरोना के संक्रमित मरीज़ को रखा जा सकता है। 36,000 भारतीयों पर एक क्वारेंटिन बेड है। आप जानते ही होंगे कि भारत के अस्पतालो में 7,39,024 बेड हैं। मुझे तमाम मीडिया रिपोर्ट में कहीं भी देश भर मे वेंटिलेटर की संख्या 30,000 से अधिक नहीं मिली है। आज भारत के स्वास्थ्य सचिव लव अग्रवाल ने कहा है कि भारत ने 1200 वेंटिलेटर का आर्डर किया है।

एक तरफ जहा जर्मनी 10,000 वेंटिलेटर का आर्डर दे रहा है, फ्रांस में एक हफ्ते में 1000-1500 वेंटिलेटर का आर्डर दे रहा है। ब्रिटेन कुछ हफ्तों में वेंटिलेटर की संख्या 8000 से 12000 करना चाहता है, न्यूयार्क को 30,000 वेंटिलेटर चाहिए, भारत ने 1200 वेंटिलेटर का आर्डर दिया है। कनाडा की सरकार ने कहा है कि 550 वेंटिलेटर खरीदेगी और स्थानीय स्तर पर वेंटिलेटर बनाने का प्रयास करेगी। एक अध्ययन के अनुसार अगले 15 दिनों में ओंटेरिया में एक भी वेंटिलेटर नहीं बचेगा। ओंटेरियो में 2000 आई सी यू और 1300 वेंटिलेटर हैं। ये सभी अभी से ही इस्तमाल हैं यानि कोई खाली नहीं है।

दुनिया भर की सरकारों अपनी कार कंपनियों कह रही हैं कि सब कुछ छोड़कर वेंटिलेटर का निर्माण करें। ब्रिटेन की संसद में इसे लेकर बहस हो रही है और भारत में सरकार गिरा कर सरकार बनाने का काम चल रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कोरोना के गंभीर मरीज़ों में 50 से 60 प्रतिशत इसलिए मर गए क्योंकि उन्हें वेंटिलेटर नहीं मिल सका।

20 मार्च की इकोनमिक टाइम्स की दिव्या राजगोपाल की रिपोर्ट है। उन्होंने भारत के वेंटिलेटर निर्माताओं से बात की है। उनका कहना है कि बाहर से विमान नहीं आ रहे हैं। हम वेंटिलेटर के बाकी उपकरण का आयात नहीं कर सकते हैं। गुरुवार को भारत ने वेंटिलेटर के निर्यात पर रोक लगा दी। इकोनमिक टाइम्स की रिपोर्टर ने Median Healthcare के प्रबंधन निदेशक से बात की है। निकुंज गादा ने कहा है कि अलग अलग सरकारों से 200 वेंटिलेटर के लिए एन्क्वायरी आई थी। जो हम पूरी नहीं कर सकते हैं। निकुंज का बयान है कि अंतराष्ट्रीय निर्माता 60 दिनों के भीतर वेंटिलेटर की आपूर्ति से मना कर रहे हैं।

इटली की सरकार ने सेना से मदद ली है। अपने यहां की एक मामूली कंपनी SIARE ENGINEERING INTERNATIONAL GROUP से मदद मांगी है। इस कंपनी के प्रमुख ने कहा है कि उनकी कंपनी एक साल में 160 वेंटिलेटर बनाती थी। अब चार महीनों में 2000 बनाने का प्रयास करेगी। वैसे वह मांग पूरी करने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि कुछ उपकरण चीन से आते हैं।

स्वीट्ज़रलैंड की दो कंपनियां Hamilton Medical AG और Getinge बड़ी कंपनियां मानी जाती हैं। हैमिल्टन एक साल में 15000 वेंटिलेटर बनाती थी जो अब इस साल 21000 बनाने जा रही है। Getinge एक साल में 10,000 बनाती थी जो अब 16000 बनाएगी। वेंटिलेटर आम उत्पाद नहीं है। कम ही कंपनियां बनाती हैं। इसलिए तुरंत वेंटिलेटर की मांग की पूर्ति करना संभव नहीं है। एक वेंटिलेटर की कीमत एक लाख डॉलर है। भारत में एक डाक्टर ने बताया कि 25-30 लाख रुपये का अच्छा वाला वेंटिलेटर आता है।

आप इंटरनेट सर्च करें। नवंबर 2019 में हाइकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल से दिल्ली के अस्पतालों में वेंटिलेटर पर स्टेटस रिपोर्ट मांगा था। इस मामले से संबंधित खबरों के अनुसार केजरीवाल सरकार ने कोर्ट से कहा था कि 15 अस्पताल 63 वेंटिलेटर का क्रय करेगे जिसमें 6 महीने लगेंगे। यह तब की बात है जब दुनिया में कोरोना का संकट नहीं था। और एक सरकार स्वास्थ्य पर प्रमुखता से ध्यान देने का दावा कर रही थी। तब आप 6 महीने में 63 वेंटिलेटर और वो भी दिल्ली में नहीं लगा सकते थे। आज की कल्पना कर लें।

बिहार जैसे राज्य का वेंटिलेटर के मामले में बहुत बुरा हाल है। हमने स्वास्थ्य सेवाओं पर कभी ध्यान नहीं दिया। कम से कम अब तो दीजिए। मीडिया को सरकार की खुशामद से फुर्सत नहीं होगी। आप अपनी सरकार से कहिए। वेंटिलेटर दीजिए। हमें चाहिए वेंटिलेटर, वेंटिलेटर और वेंटिलेटर।


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