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क्या सुषमा स्वराज भी यशवंत सिन्हा के रास्ते पर चल पड़ी हैं ?

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सुषमा स्वराज ट्विटर पर नरेंद्र मोदी के समर्थकों से सीधे भिड़ गई हैं. मामला तनवी सेठ और उनके पति से पासपोर्ट अधिकारी विकास मिश्रा की बद्तमीज़ी का है जिसमे तनवी के ट्वीट के बाद सुषमा स्वराज ने हस्तक्षेप किया और उनका पासपोर्ट जारी हो गया.

अनस और तन्वी का आरोप था उनके अंतरधर्म विवाह की वजह से मिश्रा ने पास पोर्ट रोक रखा था. सुषमा स्वराज के इस हस्तक्षेप के बाद ट्विटर पर मोदी समर्थकों ने उन्हे ट्रोल किया, भद्दी भद्दी गालियां दी और ऐसी भाषा का प्रयोग किया जिसे यहाँ लिखा भी नहीं जा सकता है.

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लेकिन लगता है सुषमा स्वराज ने इस बार मोदी समर्थकों से भिड़ने की ठान ली है. पहले उन्होने उन सब ट्वीट को लाइक कर दिया जिन अकाउंट से उन्हे गालियां दी गई थी – ऐसा करके उन्होने ज़ाहिर कर दिया कि किन अकाउंट से उन्हे ट्रोल किया गया है. लगभग सभी अकाउंट मोदी के कट्टर समर्थक हैं और उनमे कई को तो मोदी सरकार के मंत्री फॉलो भी करते हैं.

सुषमा ने चर्चा मे आये अपने उस ट्वीट को पिन भी किया हुआ है – यानि अपनी वाल मे सबसे उपर टांग दिया है. इतना ही नहीं कल रात उन्होने ट्विटर पर एक सर्वे भी शुरू किया है जिसमे उन्होने पूछा है कि क्या उन्हे ट्रोल करना उचित था. (पहली तस्वीर उसी सर्वे वाले ट्वीट का स्क्रीन शॉट है) ज़ाहिर है ज्यादा संख्या न कहने वालों की ही है. अभी तक. लेकिन उनकी ट्रोलिंग को उचित ठहराने वाले भी 40% प्रतिशत से उपर हैं यानि मोदी समर्थकों और सुषमा में जंग जारी है ट्विटर पर.

सुषमा स्वराज विदेश मंत्री हैं और उनके ट्वीट सभी दूतावासों और तमाम देशों के विदेश मंत्रालयों में गौर से देखे जाते हैं और उनका विश्लेषण किया जाता है. दूतावासों का एक अहम काम ये भी होता है कि वो भारत की घरेलू राजनीति पर नज़र रखें और अपनी सरकारों को बतायें भी। किसी के लिये भी ये अंदाज़ आसान काम है कि इन ट्रोल्स के ज़रिये पर्दे के पीछे वो किससे भिड़ रहीं हैं.

विदेश नीति के मंच पर मोदी सरकार अपने कार्यकाल के सबसे चुनौती भरे दौर में है – खासकर अमेरिका से संबंधों में आई हालिया खटास की वजह से. ऐसे में सुषमा स्वराज की ट्विटर पर ये तीखी प्रतिक्रिया मामूली नहीं है. विदेशों में और सरकार और बीजीपी के अंदर की राजनीति के दायरे में इसके कई मतलब निकाले जाना लाजिमी है.

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