Home विचार जौहर सिद्दीकी: ‘लोकतंत्र, बीजेपी, देश और उसका मेघालय’

जौहर सिद्दीकी: ‘लोकतंत्र, बीजेपी, देश और उसका मेघालय’

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मेघायल में 27 फरवरी को 60 में से 59 सीट पर विधानसभा का चुनाव हुए था, जिसका नतीजा 3 मार्च को आया था।

कांग्रेस को 21 सीट मिली थी, जबकि नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) को 19, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) को 6, पीडीएफ को 4, भाजपा को 2, एचएसपीडीपी को 2, और निर्दलीय को 6 सीट मिली थी। जबकि 2 विधायकों वाली बीजेपी ने 6 अलग अलग दल के साथ गठबंधन कर के 34 सीटों के साथ वहाँ सरकार बना ली।

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अब नतीजे पर आते हैं, जो 3 महीने बाद नज़र आ रहा है।

मेघालय कभी किसी ज़माने में शांति का पैगाम दिया करता था, आज वो जल रहा है, 2 दिनों से वहाँ अशांति है, शिलॉंग में कर्फ्यू लगा हुआ है, लेकिन इस बार निशाने पर सिख समुदाय है।

वजह बीजेपी है, समझिये, नफ़रत बीजेपी की आत्मा है, वो जहाँ रहती है, नफरत ही बोती है और नफ़रत ही काटती है, और नफ़रत के सहारे ही वो ज़िंदा है, आप शुरू से ले कर आज तक बीजेपी की तरफ नज़र उठा कर देखिये, आपको सिर्फ नफ़रत ही नज़र आएगी, साम्प्रदायिकता ही नज़र आएगी।

ये सबसे पहले मुसलमानों का डर दिखाते हैं, जहाँ मुसलमान नहीं है, वहाँ ईसाई, सिख पर आ जाते हैं, और जहाँ सिर्फ हिन्दू हैं, जैसे स्वर्ण और दलित महादलित वहाँ, ये आरक्षण का डर दिखाते हैं।

इन्हें सिर्फ वोट चाहिए, विकास इनके पल्ले नहीं पड़ता है, मंदिर मस्जिस चर्च गरुद्वारा यही तक इनकी राजनीति सीमित है, लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए सांसद विधायकों को ये आतंकी तक कह डालते हैं, मुसलमान सांसद के चुने जाने पर ये उस लोकतांत्रिक तरीके से जीत को इस्लाम की जीत और हिन्दू की हार तक कह डालते हैं, लंगर पर जीएसटी लगते हैं, मुसलमान महिलाओं को क़ब्र से निकाल कर बलात्कार करने की बात कहते हैं, दलितों से आरक्षण छीन कर उन्हें और बेसहारा कर देना चाहते हैं। कर्ज़ के बोझ तले दबे किसानों के आत्महत्या करने को दिखावा और पब्लिसिटी करने का तरीका बताते हैं।

ये किसी के नहीं हैं, यहाँ तक कि वो स्वर्ण जो बीजेपी की आईडियालॉजी को नहीं मानते उसपर सहमति नहीं जताते ये उनके भी नहीं है, ये उन्हें भी बायकॉट के देते हैं। (स्वर्ण) पंडित नेहरू भी इनकी नज़र में हिन्दू नहीं है, इनकी नज़र में सिर्फ वही हिन्दू है जो इनकी बनाई हिंदुत में यक़ीन रखता हो, बाकी सभी इनकी नज़र में देशद्रोही है, भले ही वो संविधान और उसके बनाये लोकतंत्र में कितना भी यक़ीन रखते हों।

अभी भी वक़्त है, पहचानिए इन आस्तीन के सांप को, वर्णा कल मुसलमान मारे जा रहे थे, आज सिख मारे जा रहे हैं, कल दलित मारे जायेगे जो अभी भी मारे जा रहे हैं, फिर उन सवर्णों की बारी आएगी जो बीजेपी समर्थक नहीं है। (इसके भी कुछ उदाहरण मौजूद है)

भारत लोकतांत्रिक देश है, यहाँ सभी धर्म सभी जाति सभी नागरिक एक समान्य है, कोई एक पवित्र धर्म नहीं है, कोई एक जाति पवित्र जाती नहीं है, कोई एक नागरिक पवित्र नागरिक नहीं है। यहाँ हम सब भारतीय हैं बिल्कुल एक सामान्य, पहचानिए उन्हें जो धर्म, जाती, पर बात करते हैं, उनसे पूछिये लोकतांत्रिक देश मे इन जातियों और धर्मों का क्या महत्व है, क्या लोकतंत्र भी असमानता की बात करता है? जो आप कह रहे है वही कहता है?

(ये लेखक के निजी विचार है)

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