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आपातकाल में संघियों ने भेजे थे माफीनामे, अटल और देवरस भी नहीं थे पीछे

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खुफिया ब्यूरो (आईबी) के पूर्व प्रमुख टीवी राजेश्वर सिक्किम और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे हैं। उनकी पुस्तक है – क्रुशियल इयर्स। वर्ष 2015 में इंडिया टुडे टीवी के करण थापर शो में उन्होंने बताया था कि संघ के प्रमुख बाला साहेब देवरस ने आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी को कई पत्र लिख कर माफ़ी मांगी थी और बीस सूत्रीय कार्यक्रम का समर्थन का वायदा किया था। राजेश्वर ने यह भी कहा है कि इंदिरा गांधी शुरू में आपातकाल लागू होने के छह महीने बाद ही इसे हटाने का मन बना रही थीं, लेकिन अकूत शक्ति का आनंद ले रहे संजय गांधी इसके खिलाफ थे। संघ के लोग संजय गांधी के ही समर्थक थे।

संघ को लेकर तपन बसु, प्रदीप दत्ता, सुमित सरकार, तनिका सरकार द्वारा लिखी गयी चर्चित किताब ‘खाकी शॉर्ट्स एण्ड सैफ्रन फ्लैग्ज’ भी एक महत्वपूर्ण पुस्तक है, जो आपको इस दौर की वो कुछ अनसुनी बातें बताने का काम कर सकती है। इस पुस्तक में संघ की आपातकाल के दौरान कार्यप्रणाली पर लोगों के सवालों का जवाब देने का कार्य किया हैं। इस पुस्तक में यह बताया गया है कि संघ इस दौरान इंदिरा की तारीफ क्यों कर रहा था और इंदिरा और संघ के सरसंघचालक के बीच में किस तरह का समझौता हुआ था। जेल में बंद संघ वालों से क्या वचनपत्र भरवाएं गए और संघ से पाबन्दी हटवाने के लिए विनोबा भावे की मदद से संजय से मुलाकात के प्रयास भी शामिल हैं। संघ पर इस दौर में लगी पाबन्दी को अलग तरीके से समझने के लिए यह एक उपयुक्त पुस्तक है।

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ग्वालियर जेल में आपातकाल के समय 18 महीने जेल में रहे कम्युनिस्ट नेता बादल सरोज बताते हैं कि पहले 15 दिन में माफीनामे के दो कनस्तर भर गए थे। तभी बंद किये गए 375 लोगों में से आपातकाल समाप्त होते-होते महज 50 ही लोग जेल में रह गए थे, माफ़ी लिख कर जेल से बाहर आये लोग किस विचारधारा के थे ? यह ग्वालियर में सभी जानते हैं।

आपातकाल’ में भाजपा और संघ के नेताओं ने इंदिरा गांधी से माफी मांगी थी

राजद के सांसद रघुवंश प्रसाद ने लोकसभा में दावा किया था कि ‘आपातकाल’ में भाजपा और संघ के नेताओं ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से माफी मांगी थी, ताकि, जेल से उन्हें मुक्ति मिले। उन्होंने आरोप लगाया था कि अटल बिहारी वाजपेयी ने पत्र लिखकर खुद इंदिरा गांधी से माफी मांगी थी। यहां तक कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तत्कालीन प्रमुख बालासाहेब देवरस ने भी इंदिरा गांधी को माफीनुमा पत्र लिखा था। उन्होंने इसके लिए विनोबा भावे से सिफारिश कराई थी। इंदिरा गांधी को यह वायदा किया गया था कि संघ के कार्यकर्ता रिहा होने के बाद इंदिरा सरकार द्वारा घोषित कार्यक्रमों में पूरा सहयोग करेंगे।

आपातकाल के तीन दलाल और भाजपा

आपातकाल के दौरान एक लोकप्रिय नारा था ‘‘संजय, विद्या, बंसीलाल; आपातकाल के तीन दलाल’’। इनमें से विद्याचरण शुक्ल ने भारतीय जनता पार्टी के टिकिट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा था। संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी, जो आपातकाल की प्रबल समर्थक रहीं, वे बरसों पहले भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुकी हैं और भाजपा की टिकिट पर चुनाव लड़ती हैं। वे वर्तमान में मंत्री भी हैं। बंसीलाल आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के सर्वाधिक नजदीकी राजनेता समझे जाते थे। बाद में उन्होंने भी कांग्रेस छोड़ दी और एक दौर ऐसा भी आया जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर हरियाणा में सरकार बनाई। बंसीलाल ने भी शायद कभी भी आपातकाल की निंदा नहीं की।

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हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय के साथ काम कर चुके वाल्टर के एंडरसन और संघ से नजदीकी रखने वाले श्रीधर डामले, जो कि संघ पर नए सिरे से एक किताब लिख रहे हैं, उनका दावा कुछ अलग है– इंदिरा गांधी से माफी मांगना एक रणनीति का हिस्सा था। यहां तक कि अटल बिहारी वाजपेयी को भी इंदिरा से माफी मांगने को कहा गया था। डामले ने यह भी बताया कि वाजपेयी जी ने मुझे बताया था कि मैं बिना इजाजत कुछ नहीं कर रहा।

आपातकाल, विवेकानंद संस्था और केजरीवाल

एकनाथ रानाडे का आपातकाल के दौरान विवेकानंद मेमोरियल की स्थापना के लिए कन्याकुमारी भेजा गया था। वह छह साल तक सरकार्यवाह रहे, लेकिन कन्याकुमारी जाने के बाद वह संघ में नहीं लौटे। यही विवेकानंद संस्था केजरीवाल सहित कई लोगों को उभार चुकी है।

(पंकज चतुर्वेदी, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। )

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