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ध्रुव गुप्त: ”मोदी सरकार के मास्टर स्ट्रोक”

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ध्रुव गुप्त

राजनीति पर सीधा कुछ लिखने से मैंने तौबा कर ली थी, लेकिन साप्ताहिक अखबार ‘दिल्ली की सेल्फी’ के संपादक और अपने प्रिय मित्र नित्यानंद गायेन के निरंतर अनुरोध को टाल नहीं सका। तो लीजिए,नरेंद्र मोदी सरकार के चार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक व्यंग्य रचना !

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पिछले चार सालों से मैं नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश की भाजपा सरकार का कट्टर विरोधी रहा हूं। अब लगने लगा है कि मेरा वह विरोध अकारण ही था। मेरी कमअक्ली की उपज। सरकार के चार साल पूरे होने के बाद उसके पक्ष में दर्जनों भाजपाईयों मित्रों के तर्क सुनने और देश की ताज़ा राजनीतिक स्थिति पर थोड़ा अलग तरीके से विचार करने के बाद मुझे लगा कि मेरा मोदी सरकार का विरोध देश के छद्म और अराजक बुद्धिजीवियों से ही प्रेरित था। भक्तों के अंतर्मन में झांक लेने के बाद अब मुझे साफ-साफ दिखने लगा है कि मोदी जी और उनके भक्तों के बारे में मुझे इस तरह एकतरफा नहीं सोचना चाहिए था। उनकी सरकार जो कुछ भी कर रही है, देश के भले के लिए ही कर रही है। वह हमसे ज्यादा दूरदर्शिता से सोच पा रही है और वहां तक सोच पा रही है, जहां तक आप और हम नहीं सोच सकते। उदाहरण के लिए :कुछ ही मामलों को ले लें !

देश में पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दामों से देश की आम जनता और बुद्धिजीवी इसलिए परेशान हैं क्योंकि इस मूल्यवृद्धि के पीछे के पवित्र उद्देश्य को वे समझ नहीं पा रहे। दरअसल ईंधन बढ़ते हुए दाम मोदी जी का मास्टर स्ट्रोक है। आपको याद होगा कि पिछले चुनाव से पहले मोदी जी ने देश के हर नागरिक के खाते में पंद्रह-पंद्रह लाख डालने का वादा किया था। दुर्भाग्य से सत्ता में आने के बाद वे अपना वादा पूरा नहीं कर सके। उनके आते-आते विदेशों में जमा सारा काला धन मनमोहन सरकार सफेद करवा चुकी थी। देश का खज़ाना जवाहर लाल नेहरू पहले ही खाली करके गए थे। गलती कांग्रेसियों की सही, लेकिन हमारे मोदी जी के भीतर देशवासियों से वादाखिलाफी का दर्द गहरा है। वे बेमन से पेट्रोल और डीजल का भाव इसीलिए लगातार बढ़ा रहे हैं ताकि उनके ख़ज़ाने में इस साल तक इतने पैसे आ जायं कि अगले चुनाव से से पहले वे देश के लोगों से पांच साल पहले किया हुआ अपना वादा पूरा कर सकें।

अपने वादे के मुताबिक़ मोदी जी हर साल एक या दो करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरी देनी थी। वे नहीं दे पा रहे हैं क्योंकि इसके पहले वे देश से भ्रष्टाचार मिटाने का अपना संकल्प पूरा करना चाहते हैं। भ्रष्टाचार बेरोजगारी से ज्यादा गंभीर मसला है। अगर उनके कार्यकाल में सरकार के पांच-दस करोड़ पद खाली रहेंगे तो भ्रष्टाचार में खुद-ब-खुद गिरावट आ जाएगी। न मिलेगी नौकरी, न होगा भ्रष्टाचार। इससे सरकार का भारी खर्च भी बचेगा जिसका इस्तेमाल बेरोजगार युवाओं को भविष्य में वृद्धावस्था पेंसन देने में किया जा सकता है। जवानों से ज्यादा देखभाल की जरूरत बुजुर्ग नागरिकों को ही तो होती है। युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी का एक सकारात्मक असर यह भी होगा कि इससे देश के युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना बढ़ेगी। खाली बैठे युवक बड़े पैमाने पर संघ, बजरंग दल, हिन्दू सेना, गौरक्षक दल जैसे राष्ट्रवादी संगठनों में जाएंगे और इस तरह पूरा देश भारत माता की जय, बन्दे मातरम् और गो माता की जय के नारों से गुंजायमान हो उठेगा।

मोदी जी की सरकार पर देश के बुद्धिजीवियों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि यह सरकार फासीवादी है और इसमें भिन्न विचारों के प्रति घोर असहिष्णुता है। गहराई से सोचिये तो इस आरोप में भी आपको दम नहीं दिखेगा। भिन्न विचारों के प्रति मोदी जी इतने उदार हैं कि खुद उनकी पार्टी में घनघोर वैचारिक मतभिन्नता है। मोदी जी ‘सबका साथ, सबका विकास” चाहते हैं। दूसरी तरफ उनके नब्बे प्रतिशत भक्त और पार्टी के सहयोगी संघी मानते हैं कि मुसलमानों के रहते इस देश का विकास संभव नहीं। ज्यादातर भाजपाईयों और संघियों की इच्छा मुसलमानों और उनके समर्थन में खड़े धर्मनिरपेक्ष लोगों को को पाकिस्तान खदेड़ देने की है, लेकिन भीतर से उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए भी मोदी जी बाहर से उनकी इस इच्छा की निंदा करते हैं। सरकार स्त्रियों के सम्मान और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन उसी पार्टी के एक बड़े नेता का विचार है कि स्त्री यदि मुसलमान है तो कब्र से निकालकर भी उसके साथ बलात्कार किया जा सकता है। पार्टी के ज्यादातर लोग दुष्ट पाकिस्तान से दो-दो हाथ कर लेने के पक्षधर हैं, लेकिन सरकार के लोग युद्ध की जगह पाकिस्तान को अपनी कूटनीति से दुनिया भर में अकेला करके छोड़ देना बेहतर समझते हैं। विचारों में इतने वैविध्य के बावजूद सरकार, पार्टी और संघ में सब कुछ मजे में चल रहा है। कहीं कोई लफड़ा नहीं। यह अभिव्यक्ति की आजादी नहीं तो और क्या है ?

मुझ सहित देश के ज्यादातर लोगों को लगता रहा था कि मोदी सरकार की पाकिस्तान नीति गलत है। अभी-अभी पाकिस्तान प्रायोजित आतंक का जवाब देने के लिए मोदी जी ने जो कदम उठाया है, उसने तो मुझ जैसे उनके कट्टर विरोधी को भी उनका मुरीद बना दिया है। पाकिस्तान से हाफ़िज़ सईद, सैयद सलाहुद्दीन और दाऊद इब्राहिम जैसे आतंकियों को मंगाने की जगह वहां से मीठी चीनी की बड़ी-बड़ी खेप मंगाकर उन्होंने ऐसा कूटनीतिक दाव खेला है जिसके अंजाम का खुद मूर्ख पाकिस्तानियों को भी पता नहीं है। होगा यह कि पाकिस्तान की तमाम चीनी आहिस्ता-आहिस्ता मोदी जी खींचकर भारत ले आएंगे और आने वाली ईद में ससुरे पाकिस्तानियों को फीकी सेवईया ही खानी पड़ेगी। इससे वहां के तमाम मुल्ले विद्रोह पर उतरेंगे और देश में गृहयुद्ध के हालात पैदा हो जाएंगे। पाकिस्तान के बाहर अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत उसकी अलग से बेइज्जती करेगा जिसके बाद हारकर उसके पास भारत से संधि कर लेने के अलावा कोई चारा नहीं रहे जाएगा।

मोदी जी की सरकार पर और भी बहुत सारे आरोप लगाए जा सकते हैं। लगाए जाते भी रहे हैं। ये आरोप हमारी अपनी अदूरदर्शिता के सिवा कुछ भी नहीं। मोदी सरकार का विरोध करने के लिए भी मोदी जी जैसी दूरदृष्टि चाहिए। सरकार इतनी मूर्ख नहीं जितनी लोग सोचते हैं। आप भी अगर मोदी जी की सरकार के विरोधी हैं तो कृपा करके उसके द्वारा अब तक किए गए कामों को गहराई में जाकर परखें। इससे आपकी दृष्टि भी साफ़ होगी और देश भर से भक्तों की कृपा भी आपपर बरसनी भी शुरू हो जायेगी।

(ये लेखक के निजी विचार है)

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