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मुस्लिमों की पार्टी तो नहीं लेकिन मुसलमानों के दम पर ही है कांग्रेस का वजूद

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उबैद रज़ा कादरी

पिछले दिनों उर्दू के एक बड़े अखबार “इंकिलाब” ने एक खबर छापी जिसकी हेडिंग कुछ यूं थी “हाँ कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है” अब इस एक जुमले ने भाजपा और संघ को एक ऐसा तिरियाक अता कर दिया है जिसकी उसे तलाश थी, मोदी जी ने एक रैली में बगैर राहुल गांधी का ज़िक्र किये इस जुमले को खूब भुनाया, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण जिनका काम फिलहाल यह होना चाहिए था कि म्यांमार जैसे छोटे देश ने भी जहां भारत के 7 किलोमीटर अपनी सरहद गाड़ दी प्रशांत महा सागर में चीनियों ने पूरा कब्ज़ा मार लिया इन सबको देखती, वो भी इसी मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करतीं नज़र आईं।
मानो देश की सबसे बड़ी समस्या मुसलमान हों कि इनके साथ कोई हमदर्दी कैसे दिखा दे।

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मुझे भाजपा से कोई शिकायत नही है, क्योंकि उनकी राजनीति का पैटर्न यही हिंदू मुस्लिम है, अगर वो बेचारे यह वाली लाइन छोड़ दें तो गावँ की प्रधानी में भी ज़मानत ज़ब्त हो जाये, यह उनकी USP है, और इसे बताने की किसी को भी आवश्यकता नही है। मेरा सवाल कांग्रेस से है, कि अभी तक उन्होंने मैदान में आ के यह कहने की हिम्मत क्यों नही की कि हाँ हम हैं मुसलमानों की पार्टी हैं, हमारा बुनियादी फ़लसफ़ा सेक्युलरिज्म है, मगर इसके बजाये कांग्रेस हमेशा की तरह बगलें झांकती नज़र आई, इनके प्रवक्ता कुछ और कह रहे हैं, पार्टी के बड़े लीडर कुछ और, पार्टी अध्यक्ष तो मानो कोमे में चले गए हों।

कांग्रेस से मेरा बस इतना कहना है कि आप मुसलमानों की पार्टी हो या नही, मगर आपका वजूद सिर्फ मुस्लिमों के दम से है, वो अलग बात है कि सारे इस्तेहाल इनका आप ही ने किया है, जो इस मुल्क पर हुकूमत करते थे उन्हें आपने दलितों से पिछड़ा बनाया है, जो लोगो सरकारी नौकरियों में आज़ादी के वक़्त 20% हुआ करते थे उन्हें 2% पर लाने का काम आप ही ने किया है, बाबरी मस्जिद,बटला हाउस, हाशिम पूरा, मेरठ,मलियाना, दरभंगा मुरादाबाद, और सैंकड़ों दंगे आप ही कि दें हैं, सैंकड़ों नौजवानों को टाडा पोटा के तहत आप ही ने जेलों में डाल कर उनकी ज़िंदगियों को तबाह करने का श्रय भी आप ही का है, जो संघ आज़ादी के बाद एक प्रतिबंधित संस्था घोषित कर दी गयी थी, आज उसका इतना बड़ा विस्तार के गाँव के प्रधान से देश का प्रधानमंत्री तक उनका है, यह अघोषित कार्य आप ही के हैं, फर्क बस इतना है कि पहले आप दिखाने ही को सही धर्मनिरपेक्ष वाली राजनीति करते थे, मगर आज मोदी ने आप को इस लायक़ भी नही छोड़ा कि आप अपने ट्रेक पर भी चल सकें, आप आज नन्गे हो गए हैं, आपने गुजरात कर्नाटक में मुसलमानों को एड्रैस करना भी मुनासिब नही समझा, इतनी बड़ी तादाद को नज़र अंदाज़ कर के लिंगयत जो कि अभी हैं भी नही उनको महत्व दिया।

तो जनाब राहुल जी इस क़ौम को आपकी हमदर्दी नही चाहिए, आप के लोगों ने जो इस क़ौम की माज़ी में तरक़्क़ी की है बहुत है, इसकी फ़लाह के लिए, इस क़ौम की यह हालत होना इसका मुक़द्दर है कि जब तक व्यक्तिगत रूप से एक एक आदमी नही पिटेगा सुधरेगी नहीं यह क़ौम, अभी हमारा आत्मबल घायल है लेकिन उठेंगे कभी, लेकिन आप अपनी फिक्र करो कि जेनेओ धारी सियासत कहाँ किस मोड़ पे ले आयी है ???

(ये लेखक के निजी विचार है।)

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