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मीडिया की वो रणनीति जिसके तहत ‘मुस्लिमों के पक्ष’ में बोलने वाली सेलिब्रिटीज को चुप कराया जाता है

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सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफार्म है जिसके ज़रिये आवाज़ उठायी भी जा सकती है और अगर आपके पास उचित संसाधन और पर्याप्त संख्या में फोल्लोवेर्स हैं तो अपने विरोधियों की आवाज़ दबाई भी जा सकती है. आमतौर पर जितने भी सेलेब्रिटी सोशल मीडिया से जुड़ें है वो कभी अपने फोटो, विचार, सलाह-मशवरा पोस्ट करते रहते हैं. कुछ सेलेब्रिटी सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए भी करते आये है.

लाखों करोड़ो फोलोवेर्स वाले यह सेलिब्रिटीज जब कुछ लिखते है तो बड़ी संख्या में वह बात लोगो तक पहुँचती है मसलन के तौर पर अगर प्रियंका चोपड़ा जिनके पेज पर लगभग 37 मिलियन फोलोवेर्स है, अगर वो रोहिंग्या जाती है और अपने पेज से वहां के शरणार्थी कैंप में बिठाये पलों की फोटो अपने पेज पर डालती है तो यह सामाजिक सौहार्द की बात एक साथ लाखों लोगो तक पहुंचती है. (नीचे देखें)

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लेकिन मीडिया के ज़रिये समाज में कटुता फैले रहे सांप्रदायिक तत्वों के कान तुरंत खड़े हो जाते है. ना तो वो लोग प्रियंका को रोहिंग्या कैंप में जाने से रोक सकते हैं, ना वहां जाकर पीड़ितों का हाल चाल जानने से, ना ही उनकी मदद करने से. असली खेल इसके बाद से शुरू होता है.

यह बात सर्वविदित है की सेलिब्रिटीज और मीडिया का चोली दामन का साथ है, सेलिब्रिटीज को अच्छा लगता है की मीडिया उनकी पल-पल की ख़बर को कवर करे, वह लोग क्या करते हैं?, कहाँ जाते हैं?, सब कुछ मीडिया के ख़बरों की सुर्खियाँ बनता रहे. लेकिन शातिर मीडिया उनके द्वारा किये गये अच्छे काम जब नकारात्मक छवि के साथ पेश करती है तो ‘सेलिब्रिटीज’ को बुरा तो लगता ही है और साथ-ही साथ वो इस तरह के मुद्दों से बचते नज़र आते है जहाँ उनकी इमेज नकारात्क बन रही है. यह काम मीडिया तुरंत करता हुआ नज़र आता है.

अगर बहुत आसान शब्दों में बात करें तो मीडिया में शामिल वो लोग, जो यह नही चाहते की समाज में अमन हो और पीड़ितों के मुद्दे पर बात की जाए. उन्हें सेलिब्रिटीज का अल्पसंख्यक/दलित/बलात्कार जैसे मुद्दों पर आवाज़ उठाना बुरा लगता है और हालाँकि यह लोग सेलिब्रिटीज को रोक तो नही सकते इसीलिए उनपर मनोवैज्ञानिक दवाब बनाने के लिए ख़बर को इस तरह प्रकाशित करते हैं जैसे की “फला-फलां” काम करने से लोग उनसे चिढ़ गये हैं , या जनता को उनकी यह पोस्ट पसंद नही आई. ज़ाहिर सी बात है जब सेलिब्रिटीज को यहाँ लगता है की यह बात मेरे प्रशंसकों को पसंद नही आई तो वह अगली बार उस तरह के मुद्दे पर बोलने से पहले पचास बार सोचेगा.

इसी सप्ताह सलमान खान की ईद पर रिलीज़ होने फिल्म रेस-3 का ट्रेलर लांच हुआ, जिसमे अभीनेत्री डेज़ी शाह एक डायलॉग बोलती हुई नज़र आ रही थीं. “आवर बिज़नस इज आवर बिज़नस, नन ऑफ़ योर बिज़नस“. उनके इस डायलॉग के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स गैंग ने उनको ट्रोल करना शुरू कर दिया. यह बात फिल्म के निर्माताओ तक पहुंची और आज आप टीवी खोलकर देखिये, प्रोमो से यह डायलॉग गायब मिलेगा.

इस बात को बताने का उद्देश यहाँ पर यह है की मीडिया की बातों का सेलिब्रिटीज पर कितना असर पड़ता है.

इसी तरह जब कोई सेलिब्रिटीज सोशल मीडिया पर मुस्लिम समुदाय से जुड़ें किसी मुद्दे पर बात करता है, या मुस्लिम समुदाय के पक्ष की बात करता है तो उसकी पोस्ट पर हर तरह के कमेंट आते हैं, जिसमे कुछ कमेंट नेगेटिव भी होते हैं. मीडिया सिर्फ उन दो-चार कमेंट को लेकर एक पोस्ट बना देता है की “रोहिंग्या कैंप में जाने को लेकर प्रियंका चोपड़ा हुई ट्रोल”.

सिर्फ ऐसा नही है की मीडिया की रणनीति का शिकार अकेल प्रियंका चोपड़ा ही हुई हैं, पीएम मोदी से लेकर गृहमंत्री राजनाथ सिंह भी तक को निशाना बनाया जा चूका है.

“कुछ कॉमन है इस सब ट्रोल की खबरों में”

रमजान का पवित्र महिना जब शुरू होता है तो बधाई देने वालों का तांता लग जाता है, समाज में सौहार्द चाहने वालो सभी लोग एक-दुसरे के धर्मों की मुबारकबाद देते हैं, अगर सुर-सामग्री लता मंगेशकर ने अपने सोशल अकाउंट से रमजान की बधाई दे दी तो इसमें कौन सी ट्रोल करने वाली बात हो गयी. हालाँकि जब आप इस ख़बर को पढेंगे तो खुद देखें की सिर्फ एक यूजर ने गाली दी है, (यह नीचे स्क्रीनशॉट में भी लिखा नज़र आ रहा है). यह भी हो सकता है की गाली देने वाला यह यूजर खुद “ट्रोल वाली ख़बर बनाने वाला निकले”. 

अगर आपको यह जानना है की आखिर इन ट्रोल की ख़बरों में क्या कॉमन है तो आइये कुछ और स्क्रीनशॉट पर चर्चा करते हैं.  नीचे जो स्क्रीनशॉट है उसमे एक एक्ट्रेस को इसलिए ट्रोल की ख़बरों का सामना करना पड़ा क्योंकी उसका बॉय फ्रेंड मुस्लिम है.

देश के गृहमंत्री अगर रमजान की बधाई देते हुए सीजफायर की बात करते हैं तो उन्हें भी ट्रोल गैंग सामना करना पड़ता है.

भाजपा नेता द्वारा दी गयी रमजान की बधाई को भी मीडिया के ट्रोल्लेर्स ने ख़बरों की सुर्खियाँ बना डाला.

प्रेम जाति धर्म नही देखता, लेकिन मीडिया की नज़रों से अगर देखे तो वह बालिग़ होने के कारण उन्हें रोक तो नही सकते लेकिन ‘दूसरी अभिनेत्रियों’ को ऐसा करने से पहले चेता ज़रूर सकते हैं.

अगर किसी हक बात के लिए अपने अपनी आवाज़ उठाई है तब भी सोशल मीडिया का यह गैंग आपका पीछा नही छोड़ेगा और तब तक ट्रोल करता रहेगा जब तक आप उस मुद्दे पर चुप ना हो जाए. यह बात करीना कपूर से अच्छा कौन समझ सकता है?

लेकिन जिस कॉमन बात का ज़िक्र हम कर रहे हैं वह इन सब स्क्रीनशॉट में देखने को यह मिलती है की अगर सेलेब्रिटी ‘हिन्दू’ है और वो मुस्लिम समुदाय से जुड़ी की मुद्दे पर आवाज़ उठाती है, उन्हें बधाई देती है, उनकी सराहना करती है तो उन्हें ट्रोल की ख़बरों से दो-चार होना पड़ेगा. इसके पीछे ‘मुस्लिम समुदाय को हाशिये पर धकेल देने वाली’ रणनीति है जो नही चाहते की किसी भी तरह कोई भी मुस्लिम समुदाय की बात करें.

यहाँ तक की अगर कोई मुस्लिम सेलेब्रिटी पीड़ितों के पक्ष में आवाज़ उठाता है तो उसे भी यह ख़बरें अपनी सुर्खियाँ बना लेती हैं. जब बात निकल पड़ी है तो साथ साथ एयर और बात की चर्चा करते चले. चूँकि सोशल मीडिया पर यह पता नही होता की आईडी इस्तेमाल करने वाले अकाउंट के पीछे कौन बैठा है, इसी तरह इरफ़ान पठान से लेकर मोहम्मद शमी तक ने जब अपनी पत्नियों के फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड किये तो मीडिया का यही गैंग दो-चार कमेंट को लेकर यह साबित करने में लगा गया की “एक समुदाय विशेष” कितना कट्टरपंथी है जो किसी के लिबास यह हाथों के नेल-पेंट को लेकर फतवे सुना सकता है.

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