आईए 2 से 10 अप्रैल 2020 को अंतरराष्ट्रीय दुरूद सप्ताह मनाएं

मौलाना मोहम्मद इमरान बरकाती

लॉक डाउन के इस फ्री वक्त में जब ना हम कोई फंक्शन कर पा रहे हैं और ना इज्तिमाई इबादतें, आईए! एक ऐसी इन्फ़िरादी इबादत की तरफ़ जो हमारा रुहानी तअल्लुक़ बेपनाह मज़बूत करती है और वह है दुरूद शरीफ का विर्द।

दुरूद शरीफ ऐसी अकेली इबादत है, जो बंदों के हक़ में ज़िक्र, इताअते ख़ुदावंदी, इत्तिबा ए सुन्नत और इबादत है और ख़ुदा की तरफ़ से अपने नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम पर इनायतों की इंतिहा लेकिन बंदों की तमाम इबादतों में यह एक ऐसा काम है जो ख़ुदा भी करता है, उस के मासूम फ़रिश्ते भी करते हैं और उसने अपने साहिब-ए-ईमान बंदों को भी ज्यादा से ज्यादा यह काम करने का हुक्म दिया है।

दुरूद शरीफ का ज़िक्र करते हुए अल्लाह-तआला ने ज्यादा से ज्यादा यह काम करने का हुक्म इरशाद फ़रमाया जबकि आम तौर पर तमाम इबादतों के लिए यह अंदाजे बयान नहीं मिलता, इसी वजह से अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने अपने सहाबी के पूछने पर पुरा वक़्त दुरूद शरी पढ़ते रहने में अपनी बहूत ज़्यादा खुशी का इज़हार फ़रमाया।

दुरूद शरीफ की बेपनाह फ़ज़ीलतें आई हैं, उनमें मुसीबतें और बलाऐं दूर होना भी है और चूँकि इस वक़्त पूरी दुनिया एक महामारी से घिरी हुई है, इसलिए उम्मीद है कि इंशा अल्लाहु तआला लाचार व मजबूर दुनिया के लिए यह वज़ीफ़ा दवा का काम करेगा।

दुरूद शरीफ़ नबी सल्लल्लाहु तआला आलैहि वसल्लम से उम्मती के रिश्ते की मज़बूती की दलील है और इसे इस दौर की कम नसीबी जानना चाहिए कि इस दौर में यह रुहानी रिश्ता बहुत कमज़ोर हो चुका है, तभी तो ना रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की गुस्ताख़ियों पर हमारा ख़ून जोश में आता है और ना ही हज़ार ज़बानी दावों के बावजूद आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की तालीमात हमारी ज़िंदगी का हिस्सा रही हैं। इसलिए अगर हम भला चाहते हैं तो ज़रूरी हो चुका है कि इस गुमशुदा नेअमत की तलाश की जाये और इस गैरत की बेदारी का बड़े पैमाने पर काम हो।

चूँकि यह ज़िंदगी भर सींचा जाने वाला रिश्ता है, इसलिए एक हफ़्ते का वक़्त इस अजीम और पाकीज़ा मिशन के लिए किसी तरह काफ़ी नहीं हो सकता लेकिन अक़लमंदी यह है कि लॉकडाउन के इस फ्री वक़्त का बेहतरीन फ़ायदा उठाते हुए, दुरूद शरीफ के आम करने का काम ज्यादा से ज्यादा हो।

चूँकि जुमा की रात और जुमा के दिन दुरूद शरीफ पढ़ने की ख़ुसूसी फ़ज़ीलतें आई हैं, इसलिए इस हफ़्ते का आग़ाज़ जुमा की रात यानी जुमेरात को मग़रिब बाद से हो कर अगले जुमा की असर बाद तक होगा, यह वक़्त भले ज़ाहिर में हफ़्ते से थोड़ा बढ़ जाता है लेकिन ऐसे भले काम के लिए यह बढ़ जाना कुछ मुश्किल नहीं होना चाहिए।

तरीक़ा यह अपनाएं कि रोज़ाना सुबह से शाम और रात से दिन तक, जब भी फ्री हों अपने घर वालों, अपने बच्चों और अपने दोस्त व अहबाब को लेकर बैठें और इज्तिमाई तौर पर, या फिर इन्फ़िरादी तौर पर जैसे भी मुम्किन हो दुरूद व सलाम का वज़ीफ़ा करते रहें।

दुरूद व सलाम की एक ख़ास बरकत यह भी है कि इस से बच्चों के अख़लाक़ में पाकीज़गी और मिज़ाज में इस्लामी नफ़ासत पैदा होती है, आज के अखलाक खराब करने वाले इस ज़माने में यह नुस्ख़ा कितना अनमोल है, बताने की ज़रूरत नहीं, अक़ल मंदों को इस फ्री वक़्त में यह नुस्ख़ा ज़रूर आज़माना चाहिए।

यह अपील किसी एक तहरीक, या फ़र्द, या जमाअत की तरफ़ से नहीं बल्कि जो भी नबी ए अकरम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के आशिक हैं, उनके जज़बात की तर्जमानी है और जिन लोगों को पहले-पहल यह ख़्याल आया, या अब जो लोग यह तहरीक चला रहे हैं, वो उम्मत को सिर्फ उस की भूली ज़िम्मेदारीयों का एहसास दिलाने का काम कर रहे हैं, क्योंकि इंतिज़ाम करना भी कोई चीज़ है, इसलिए यह इंतिज़ामी काम तहरीक उलमा ए हिंद अपनी सहयोगी तन्ज़ीमों के साथ देखा करेगी, मज़ीद जो तंज़ीमें, अफ़राद, इदारे इस नेक काम में शिरकत करना चाहते हैं, वो इस ईमेल, या व्हाट्सएप से राबता कर सकते हैं, या अपने तौर पर भी इस तहरीक को आगे बढ़ा सकते हैं।

10 अप्रैल को असर बाद पूरे हफ़्ते दुनिया भर में पढ़े गए दुरूद व सलाम को एक साथ बारगाहे रिसालत मआब सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम में खिराज के तौर पर पेश किया जाएगा और उम्मत के लिए ख़ुसूसी दुआओं का एहतिमाम होगा, जो भाई इस इजतिमाई पेशकश, या दुआ का हिस्सा बनना चाहते हैं, वो भी नीचे दिए गए ईमेल, व्हाट्सएप से राब्ता कर सकते हैं।

तहरीक उलमा ए हिंद के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल तहरीक टीवी (Tahreek TV) की कोशिश रहेगी कि इस दौरान रोजाना सूरज निकलने यानी इफ़तार से आधा घंटे पहले दुरूद व सलाम के फ़ज़ाइल पर लाईव स्पीच और ख़ुसूसी दुआ का एहतिमाम कर सके। अल्लाह तआला तौफीक दे।


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