No menu items!
23.1 C
New Delhi
Tuesday, November 30, 2021

स्पेशल रिपोर्ट- भारतियों के चीनी खाने से पाकिस्तानी सेना मज़बूत?

कोहराम न्यूज़ विशेष रिपोर्ट – टीवी चैनल बदलते रहिये, आपको एक से एक संप्रदाय मुद्दों पर बहस करते हुए “कोबरा स्टिंग” द्वारा सत्यापित बिकाऊ जर्नलिस्ट मिल जायेंगे. जो हर मुद्दे को धार्मिक रुख देने के लिए जाने जाते हैं. वैसे कर्णाटक विधानसभा चुनावों में एक बात ने काफी जोर पकड़ा. वह यह की ‘भारत पाकिस्तान से चीनी की आपूर्ति करता है, यह सीधा सीधा केंद्र सरकार पर आरोप लगाया गया था. चूँकि कोहराम न्यूज़ सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी खबर को बिना तफ्तीश करे आपके सामने नही रखता वैसे ही हमने सोचा की इस खबर की सचाई तलाशी जानी चाहिए.

जो मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है उनमे कुछ इस तरह कहा जा रहा है “पाकिस्तान से 60 लाख मैट्रिक टन चीनी आयात की गयी। पैसा अदा किया गया ₹3,190,00,000.”.

आइये पहले तो यह पता लगाते है की भारत क्या पाकिस्तान से चीनी मंगवाता भी है या नही और मंगवाता है तो प्रतिवर्ष कितनी चीनी पाकिस्तान से आयात की जाती है . इसके लिए सबसे पहले हमने चेक की ट्रेडिंग की सभी जानकारी देने वाली वेबसाइट ट्रेड इकोनॉमिक्स.

इस वेबसाइट के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के बीच हमेशा से ही व्यापार चलता रहा है, हालाँकि समय समय पर इसमें कमी या बढ़ोतरी देखने को मिलती है लेकिन ऐसा पिछले 10 वर्षों पर अगर नज़र डालें तो ऐसा कोई भी मौका नही आया जब दोनों देशों के बीच पूरी तरह से व्यापार बंद हुआ हो. नीचे जो ग्राफ आप देख रहे है वो पिछले दस वर्षों का आंकड़ा दिखा रहा है.  राईट साइड में जो संख्या लिखी है वो INR Billion में मुद्रा है.

वेबसाइट के मुताबिक सर्वाधिक ट्रेडिंग यूपीए सरकार के समय 2013 के अंतिम महीनो में हुई वहीँ जिसके बाद दोनों देशों के बीच ऐसा समय भी आया जब ट्रेडिंग मिनिमम 2 बिलियन से भी नीचे पहुँच गयी तथा गौर करने वाली बात यह है की देश में केंद्र सरकार बदलने के बाद इसमें फिर उछाल आना शुरू हो गया.

पिछले दो वर्षों की ट्रेडिंग पर अगर नज़र डाले तो पाकिस्तान से आयात करने वाले सामान की कीमत लगभग 3.5 बिलियन तक पहुँच गयी थी, जिसके बाद कुछ उतार देखने को मिला. चलिए अब बात करते है दोनों देशों की ट्रेडिंग में मिठास घोलने वाली चीनी की.

16 मई को न्यू इंडियन एक्सप्रेस में एक खबर प्राकशित हुई जिसके मुताबिक वर्ष 2017-18 में 4.68 मिलियन डॉलर की 240,093 MT(मीट्रिक टन) चीनी पाकिस्तान से आयात की गयी. पाकिस्तान से चीनी खरीदने के पीछे एक कारण यह भी बताया जाता है की पाकिस्तान सरकार प्रति किलो चीनी पर 10.7 रुपए की सब्सिडी देती है, जो की भारत की काफी सस्ती पड़ जाती है.

इसमें जो एक बात गौर करने लायक है वो यह की 2016-17 में 2.14 MT चीनी पाकिस्तान से आयात की गयी थी वहीँ यह आंकड़ा 2017-18 में बढ़कर 2.40 मीट्रिक टन जा पहुंचा. ऐसा नही है की देश में खपत होने वाली सम्पूर्ण चीनी पाकिस्तान से ही आयातित की जाती है बल्कि देश की अधिकतर चीनी ब्राज़ील से आती है. चूँकि चीनी 100% कस्टम फ्री है इसीलिए इसपर कस्टम चार्ज ना लगने के कारण भी आयातित चीनी सस्ती पड़ती है.

पिछले दो महीनो में भारत द्वारा निर्यात की गयी चीनी 2,40,093 टन हैं. वहीँ वित्त मंत्रालय के मुताबिक पाकिस्तान से आयातित चीनी, भारत में निर्मित चीनी के मुकाबले सस्ते दामों पर मिल जाती है. वहीँ दूसरी तरफ वित्त मंत्रालय अभी इस आयातित चीनी पर रोक लगाने के मामले नकारात्मक रवैया ही अपना रहा है.

यह तो मामला बिलकुल साफ़ है की देश में बड़ी मात्रा में चीनी पाकिस्तान से मंगवाई जा रही है लेकिन अब आपके चौकाने की बारी है. अगर आपको लग रहा हो की भारत की चीनी सम्बंधित आंकड़ो को इतनी संख्या देखकर कोई भी चौंक सकता है तो आप गलत है, अब जो जानकारी आपको देने जा रहे हैं वो आपको अन्दर ही अन्दर झिंझोड़ सकती है.

कहा जाता है पाकिस्तानी चीनी का पैसा?

हम जानते हैं की पाकिस्तान की आर्मी पूरे देश को नियंत्रित करती है, जितना समय पाकिस्तान में लोकतंत्र रहा है उतने ही समय वहां सेना का शासन भी रहा है. जनरल परवेज मुशर्रफ का नाम उन सैनिक तानाशाहों में गिना जाता है जिन्होंने देश की सत्ता का तख्तापलट करके वहां सैन्य शासन लागू किया. आपको यह भी बताते चले की जब किसी देश पर सैनिक शासन हो जाता है तो तमाम विभागों को सुचारू रूप से चलाने के लिए देश की सभी ईकाइयों पर भी सेना कब्ज़ा जमा लेती है. पाकिस्तान का हाल भी कुछ ऐसा ही है. पाकिस्तान के सबसे बड़े अखबार में 21 जुलाई 2016 को एक रिपोर्ट प्राकशित होती है, जिसमे उन 50 उधोगधंदे की लिस्ट बताई जाती है इसमें ख़ास बात यह है की इसमें चीनी मीलों का नाम भी है. इस स्क्रीनशॉट में AWT का मतलब आर्मी वेलफेयर ट्रस्ट है.

आज से 10 वर्ष पूर्व अल जज़ीरा में एक खबर प्राकशित होती है जिसमे पाकिस्तान सेना की देश में किये जा रहे रोज़गार को लेकर एक रिसर्च रिपोर्ट सामने आती है. जिसमे यह बताया गया है की किस तरह पाकिस्तानी सेना 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार करती है. रिपोर्ट में यह बताया गया है की आर्मी को इस तरह का व्यापार करने की ज़रूरत इसलिए पड़ी क्योंकी देश की खराब अर्थव्यवस्था के कारण आर्मी को वित्त आपूर्ति तथा सैनिक साजों-सामान के लिए अच्छा बजट चाहिए होता है. जिसके लिए पाकिस्तानी सेना विभिन्न सरकारी उद्योगों के ज़रिये आर्मी के लिए “ख़ास” मुद्रा बनाये रखती है.

अपने रिपोर्ट में अलजजीरा ने आयेशा सिद्दीका का इंटरव्यू प्राकशित किया, आयशा “मिलिट्री आईएनसी. इनसाइड पाकिस्तान मिलिट्री इकॉनमी की ऑथर हैं. जिसमे आयशा बताती है की अपने रिटायर सैनिकों की पेंशन, सेना द्वारा वेलफेयर फाउंडेशन चलाने के लिए सेना लगभग 10 बिलियन डॉलर का इन्वेस्टमेंट करती है, जिनमे आयल तथा गैस, सुगर मिल्स, सुरक्षा तथा रोज़गार सेवाएं शामिल हैं.

इसमें एक बात और जोड़ते चले की पाकिस्तान में चलायी जाने वाली अधिकतर सुगर मिल्स के मालिक भूतपूर्व सैनिकों हैं. ऐसे ही एक मामले को लेकर सन 2008 में एक केस काफी चर्चाओं में रहा जब वहां की सरकार ने एक सुगर मिल रिटायर सैनिक को औने पौने दामों पर बेच डाली थी.

निष्कर्ष

पहले तो यह साबित हुआ की भारत पाकिस्तान से एक बड़े लेवल पर चीनीआयात करवाता है, जो की बदस्तूर जारी है तथा सरकारी मंत्रालय भी उसे रोकने के पक्ष में नज़र नही आता.

दूसरा यह की पाकिस्तानी चीनी मिलों पर सेना का अधिपत्य है तथा सेना 10 बिलियन डॉलर का निवेश प्रतिवर्ष इसमें करती है और उससे होने वाले मुनाफे का इस्तेमाल सैनिक साजों-सामान खरीदने, सैनकों को पेंशन देने में करती है.

इसका मतलब यह निकलता है की जितनी चीनी भारत में खाई जाएगी उतनी ही पाकिस्तानी आर्मी मज़बूत बनेगी.

Get in Touch

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Get in Touch

0FansLike
3,034FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest Posts

error: Content is protected !!