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राज्य सभा टी वी – मामला सेट है

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ऐसे समय मे जबकि नरेंद्र मोदी सरकार संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों की सीधी भर्ती करके निजी क्षेत्र से सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है, राज्यसभा टेलीविजन (आरएसटीवी) इसके उलट करने की में व्यस्त है।

विवादों के लिए आरएसटीवी नया नहीं है लेकिन पिछले नौ महीनों में चैनल गड़बड़झालों की नई गहराई तक उतर गया है, खासकर भर्ती के मामले में। मुख्या संपादक की नियुक्ति से शुरू हो कर अब कार्यकारी संपादक व अन्य नौकरियों के लिए निकाले गएविज्ञापन चैनल ने चालाकी की पूरी कोशिश की है हालांकि “बुद्धिमान भर्ती” के प्रयास में ख़ास बुद्धिमानी दिखाई नहीं दे रही है। फिक्सिंग की पूरी कहानी कुछ ख़ास पदों के लिए “अनुभव आवश्यकताओं” में साफ़ दिखाई दे रही है।

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आरएसटीवी में नौकरियों के लिए अनुभव के मापदंड का ब्यौरा दिलचस्प है और पढ़ने और सोचने की जिज्ञासा बढ़ाता है। संसद से संबंधित समाचार प्रबंधन में अनुभव की आवश्यकता किसे होनी चाहिए और किसे नहीं इसे पढ़ कर लगता है की मानदंड तय करतेसमय व्यक्ति विशेष के अनुभव को ध्यान में रखा गया था मानदंडों की तर्कसंगतता को नहीं।

हालांकि राहुल महाजन को आरएसटीवी का मुख्य संपादक (Editor-in-Chief/ EnC) नियुक्त कर दिया गया है, लेकिन शीर्ष संपादकीय स्थान के लिए मानदंड की तुलना नीचे के दो-तीन स्तरों के लिए तय मानदंड के साथ करना काफी दिलचस्प हो रहा है। जैसेजैसे आप वरिष्ठता स्तर पर नीचे की ओर देखते हैं तो अनुभव के मानदंड और कठिन हो जाते हैं। मुख्य संपादक (ई एन सी) , कार्यकारी संपादक (ई ई), कार्यकारी निर्माता (इनपुट) (ई पी) और एसोसिएट कार्यकारी निर्माता (इनपुट) (ए ई पी) की नौकरी के लिएआवश्यक मानदंडों को देखें तो बड़ी रोचक तस्वीर उभरती है।

गौर करिये की मुख्य संपादक (ई एन सी) और कार्यकारी संपादक (ई ई) के दोनों शीर्ष पदों के लिए संसदीय समाचारों को संभालने में अनुभव की कोई आवश्यकता नहीं है। लेकिन जब आप वरिष्ठता की सीढ़ी पर नीचे जाते हैं तो संसदीय समाचारों की मांग अचानकआवश्यक हो जाती है। ई पी और ए ई पी दोनों को क्रमशः संसद समाचार रिपोर्टिंग में 5 साल और 4 साल का अनुभव होना चाहिए। ये भी गौरतलब है कि विज्ञापित सभी संपादकीय पदों में से केवल ई पी और ए ई पी को संसदीय रिपोर्टिंग अनुभव की आवश्यकता है।

ऐसा लगता है कि संसद पर समाचार की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की पूरी ज़िम्मेदारी केवल ईपी और एईपी पर निर्भर रहने वाली है। दोनों आरएसटीवी प्रणाली का केंद्र बिंदु प्रतीत होते हैं। शायद यही कारण है कि उन्हें ई एन सी और ई ई के बराबर, 15 वर्षों केसमग्र अनुभव की आवश्यकता होगी। ओहदे और पारिश्रमिक के आधार पर देखें तो ई पी और ए ई पी लगभग तीसरे और चौथे स्तर के कर्मचारी होंगे। ई एन सी और ई ई के मुकाबले कनिष्ठ ई पी और ए ई पी को न केवल व्यावसायिक तौर पर बेहतर होनेकी आवश्यकता है, बल्कि टेलीविजन उद्योग में ई एन सी और ई ई से कहीं अधिक अनुभव होना भी आवश्यक है। मुख्या संपादक को जहाँ केवल पांच साल के टीवी अनुभव की आवश्यकता है, ईपी अनिवार्य रूप से 10 वर्षों के टेलीविजन अनुभव की आवश्यकता है।संपादकीय कमांड में दूसरे नंबर पर कार्यकारी संपादक को केवल 5 वर्षों के टेलीविज़न अनुभव की आवश्यकता है, दूसरी तरफ एईपी (जो कि लगभग चौथे स्तर का कर्मचारी है) के पास 10 वर्षों का टेलीविज़न रिपोर्टिंग का अनुभव होना चाहिए। अविश्वसनीय रूप सेईपी और एईपी को मुख्य संपादक (ई एन सी) और कार्यकारी संपादक (ई ई) की तुलना में वरिष्ठ पद पर काम करने के अधिक अनुभव की भी आवश्यकता है।

अनुभव के मानदंड के आधार पर ईपी और एईपी नियुक्त किये जाने वाले उम्मीदवार कुल अनुभव और विषय आधारित अनुभव की कसौटी पर ई एन सी और ई ई से एक स्तर ऊपर ही होंगे, फिर भी उन्हें काफी कम पारिश्रमिक मिलेगा। जहाँ ई एन सी को मासिकरूप से 240000 / – रुपये मिलते हैं और ई ई को रुपये 200000 / – वहीँ बेहतर अनुभव के बावजूद ईपी को रूपये 150000 / – और एईपी प्रति माह केवल 1,25000 / – रुपये मिलेगा।

आरएसटीवी में भर्ती के फिक्सिंग के हाल ही में कुछ रिपोर्टें थीं और कुछ नाम मीडिया में भी आये थे। ईई के पद के लिए विभाकार और ईपी (इनपुट) के पद के लिए विशाल दहिया के चर्चित हुए थे। यदि इन पदों के लिए प्रकाशित विज्ञापन में मानदंड को देखा जायेतो इन अपुष्ट बातों पर कुछ भरोसा हो सकता है।

यदि ईई पद के लिए आवश्यक योग्यता पर नज़र डालें तो विभाकर का नाम असंभव नहीं लगता। ऐसा लगता है कि इस वरिष्ठ पद के लिए आवश्यक योग्यता को कम रखा गया है क्योंकि विभाकर अभी केवल दो ही वर्षों से वरिष्ठ संपादकीय पद पर रहे हैं। अब तकउन्होंने केवल असाइनमेंट डेस्क पर काम किया है। विभाकर इस समय डी डी न्यूज़ में कार्यरत हैं।

उधर ईपी (इनपुट) के पद के लिए विशाल दहिया का नाम काफी चर्चा में रहा। विशाल डी डी न्यूज़ में अपने कार्यकाल के दौरान ए ए राव के संपर्क में है। पंद्रह वर्ष के कुल अनुभव के साथ साथ 5 वर्ष की संसदीय समाचार रिपोर्टिंग की अनिवार्यता के चलते बहुत सेलोग इस पद के लिए आवेदन भी नहीं दे पाए।

वहीँ एईपी (इनपुट) की तीसरी पोस्ट के बारे में भी सूत्र अनुमान दे रहे हैं। इस पद के लिए टेलीविजन में 10 साल और अनिवार्य 4 साल के संसदीय समाचार प्रबंधन के साथ 15 साल का अनुभव भी आवश्यक है। आरएसटीवी के अंदर से एक व्यक्ति जो आसानी सेयोग्यता प्राप्त कर सकता है वह स्मिता नायर है। स्मिता वर्तमान में आरएसटीवी के साथ एक सीनियर प्रोड्यूसर है और ए ए राव के कैम्प की मानी जाती है। राज्य सभा सचिवालय में कार्यरत अतिरिक्त सचिव राव आरएसटीवी प्रभारी है। ।

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