अजब गज़ब

इस मुस्लिम परिवार के बिना नहीं मनाया जाता यहाँ का दशहरा

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जम्मू | जम्मू कश्मीर के हिन्दू बहुल क्षेत्र जम्मू में दशहरे की तैयारी पूरी जोर शोर से चल रही है. लेकिन हिन्दुओ का यह त्यौहार , एक चीज के बिना अधुरा है. अधर्म पर धर्म की जीत का यह त्यौहार , रावण, मेघदूत और कुम्भकर्ण के पुतलो के दहन के साथ पूरा होता है. जम्मू क्षेत्र में इन पुतलो को बनाने के लिए उत्तर प्रदेश से लोगो को बुलाया जाता है.

आपको जानकार हैरानी होगी की जम्मू पहुंचकर जो लोग इन पुतलो को बनाते है , वो मुस्लिम है. मेरठ का रहना वाला यह मुस्लिम परिवार हर साल जम्मू पहुंचकर रावण और अन्य के पुतले बनाने का काम करते है. मुस्लिम होने के बावजूद , लोग इन कलाकारों का बाहें फैलाकर स्वागत करते है. ये लोग दशहरे से एक महिना पहले जम्मू पहुँच जाते है.

मेरठ के रहने वाले मोहम्मद गयासुदीन बताते है की हम 40 लोगो की टीम है. हर साल दशहरे से एक महिना पहले हम जम्मू पहुँच जाते है. हम यहाँ जम्मू के अलावा आसपास के क्षेत्र राजौरी, पूंछ, डोढा और किश्तवाड़ से भी लोग पुतले बनवाने का आर्डर देते है. जब हमारे बनाये गए ये पुतले , दशहरे पर जलाये जाते है तो हमें लगता है की हमें हमारे काम का इनाम मिल गया. हम ऐसे पहले कलाकार होंगे जो चाहते है की हमारा बनाया सामान नष्ट किया जाए.

ग्यासुद्दीन , इस टीम का मुखिया है. ग्यासुद्दीन का मानना है की दशहरा न केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है बल्कि संप्रदायिक सोहार्द का भी प्रतीक है. जब हम यहाँ पहुँचते है तो लोग हमारा जो आदर सत्कार करते है , उससे हमें बड़ी ख़ुशी होती है. उन लोगो को पता है की हम मुस्लिम है लेकिन फिर भी हमारे आदर सत्कार में कोई कमी नही होती. पूरे जम्मू क्षेत्र में हमारे बनाए गए पुतलो का दहन होता है.

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