धर्म

तीन बार तलाक के मामले में टीवी डिबेट पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार

supreme-court1_0

नई दिल्ली | मुस्लिम समाज में मौजूद तीन बार तलाक और पुरषों को मिली चार शादियों की व्यस्वस्था पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सितम्बर तक अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा मामले पर हो रही टीवी डिबेट पर रोक लगाने से भी इंकार कर दिया.

टीवी डिबेट पर रोक लगाने की मांग

मुस्लिम समाज में तीन तलाक की व्यवस्था पर फरहा फैज़ ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका डाली हुई है. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. इस याचिका में याची ने तीन तलाक पर हो रही टीवी डिबेट पर भी रोक लगाने की मांग की थी.

कोर्ट एकपक्षीय सुनवाई नही कर सकता

मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा की यह एक संवेंदंशील मामला है जिस पर सभी पक्षों को अपनी राय रखने का पूरा अधिकार है. कोर्ट ने याची से कहा की हम आपकी याचिका ख़ारिज नही कर रहे है लेकिन इस मामले में हम एकपक्षीय फैसला नही ले सकते. कोर्ट ने कहा की अगर मामला अधिक गंभीर हो जाता है तो हम आपकी इस याचिका पर जरुर विचार करेंगे.

केंद्र ने माँगा तीन हफ्ते का समय

इससे पहले कोर्ट ने केंद्र सरकार को कोर्ट में अपना पक्ष रखने को कहा था जिस पर केंद्र ने कोर्ट से तीन हफ्ते का समय माँगा था. केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को समय देते हुए कोर्ट ने अदालत को 6 सितम्बर तक के लिए स्थगित कर दिया.

तीन तलाक और चार शादियों पर कोर्ट में चार याचिका

गौरतलब है की मुस्लिम सामाज में मौजूद तीन तलाक और चार शादियों को स्वयं संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने खुद की एक जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू की थी. इसके बाद इस मामले में कोर्ट को चार याचिकाये और मिली. इसके बाद कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लिए मामले को इन याचिकाओ के साथ जोड़ दिया और सारी याचिकाओ को एक कर दिया. एक याचिका में मुस्लिम धर्मगुरूओ , मुस्लिम पर्सनल बोर्ड और कुछ मुस्लिम संगठन पर समाज को गुमराह करने का भी आरोप लगाया गया है.

बाबरी मस्जिद मामले में भी लगी थी टीवी डिबेट पर रोक

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा की टीवी डिबेट के जरिये उन पर दबाव बनाया जा रहा है. याचिकाकर्ता ने टीवी डिबेट पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा की बाबरी मस्जिद मामले में भी कोर्ट ने ऐसे कार्यक्रमों पर रोक लगा दी थी तो इस बार भी कोर्ट ऐसा कर सकती है. लेकिन कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग को नामंजूर कर दिया .

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top
error: Content is protected !!