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वरुण गाँधी ने इशारो इशारो में साधा मोदी सरकार पर निशाना कहा, वेमुला की चिट्ठी पढ़कर आया रोना

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इंदौर | सुल्तानपुर से बीजेपी सांसद और मेनका गाँधी के पुत्र वरुण गांधी अपनी वाकपटुता के लिए जाने जाते है. उनकी भाषण शैली से काफी लोग प्रभावित है. लेकिन वो उत्तर प्रदेश में हो रहे विधानसभा चुनावो से नदारद है. एक समय बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवारों में नाम होने के बावजूद उनको चुनावो में नजरंदाज कर दिया गया. शायद इसी वजह से वरुण भी बीजेपी से नाराज चल रहे है.

उनकी नाराजगी की एक बानगी मध्यप्रदेश के इंदौर में दिखाई दी. यहाँ एक स्कूल में व्याख्यान देने आये वरुण गाँधी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला. वरुण ने उन सभी मुद्दों का यहाँ जिक्र किया जिनको लेकर बीजेपी हमेशा से ही असहज रही है. इसके अलावा मोदी सरकार अभी तक जिस बात को अपनी उपलब्धिया बताई आई है, उन्ही बातो की वरुण गाँधी ने हवा निकाल दी.

‘विचार नये भारत का’ व्याख्यान में बोलते हुए वरुण गाँधी ने कहा की देश में करीब 18 फीसदी अल्पसंख्यक है लेकिन इनमे से केवल चार फीसदी लोग ही उच्च शिक्षा हासिल कर पाते है. यह एक बड़ी समस्या है और हमे इसका हल निकालना चाहिए. मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि जीडीपी की हवा निकालते हुए वरुण ने कहा की केवल जीडीपी बढ़ने से बाकी मूलभूत समस्याओ का हल नही होता.

उन्होंने कहा की जीडीपी दर देश की विकास दर का पैमाना नही हो सकती. इसलिए इस उपलब्धि पर फूल कर कुप्पा होने की भी जरुरत नही है. बढ़ी हुई जीडीपी से देश में फैली अशिक्षा, स्वास्थ्य और बेरोजगारी जैसी समस्याओ का हल नही निकलता. विजय माल्या और किसानो की आत्महत्या पर बोलते हुए वरुण गाँधी ने कहा की एक तरफ कुछ चंद पैसो के लिए किसान को आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया जाता है जबकि विजय माल्या जैसा आदमी हजारो करोड़ रूपए लेकर विदेश भाग जाता है.

वरुण गाँधी ने औधोगिक घरानों को मिल रही रियायत को गलत बताते हुए कहा की एक तरफ अमीर को खूब रियायते मिल रही है जबकि गरीब की बची कुची संपत्ति को भी निचोड़ लिया जा रहा है. वरुण गाँधी ने रोहित वेमुला का भी जिक्र किया. इस पर वरुण ने कहा की हैदराबाद के पीएचडी के छात्र ने अपनी जान दे दी. उनकी चिट्ठी पढ़कर मुझे रोना आ गया. इसमें उसने लिखा था की मैं इसलिए जान दे रहा हूँ क्योकि मैंने इस रूप में जन्म लेने का पाप किया है.