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भाजपा सांसद ने नगर वधु से की राहुल की तुलना कहा, जालीदार टोपी तक सिमटी रही राहुल की धर्मनिरपेक्षता

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उज्जैन । कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आजकल काफ़ी आकर्मक तेवरों के साथ गुजरात में चुनाव प्रचार कर रहे है। इस दौरान वह राज्य और केंद्र की भाजपा सरकार पर लगातार निशाना साध रहे है। इसके अलावा उन्होंने जीएसटी और नोट बंदी पर भी आक्रामक तेवर अपनाए हुए है। इन सबके साथ साथ राहुल ने गुजरात के कई मंदिरो में पूजा अर्चना भी की है। यही बात भाजपा को लगातार परेशान कर रही है।

गुजरात में राहुल के सॉफ़्ट हिंदुत्व ने भाजपा को इतना डरा दिया है कि अब उनके कुछ नेता राहुल के ख़िलाफ़ अपशब्दो का भी इस्तेमाल करने लगे है। मध्य प्रदेश के उज्जैन से भाजपा सांसद चिंतामणि मालवीय ने राहुल की तुलना एक नगर वधु से करते हुए कहा की आख़िर वह गुजरात के मंदिरो में ही क्यों जा रहे है। कभी कश्मीर, कर्नाटक, केरल के मंदिर में क्यों नही जाते?

मालवीय ने अपने फ़ेस्बुक पेज एक लम्बी चौड़ी पोस्ट के ज़रिए राहुल गांधी पर निशाना साध। उन्होंने लिखा,’ यह देखकर बड़ी खुशी हुई कि गुजरात में जाकर राहुल गांधी धार्मिक हो गए हैं। तो क्या अचानक ही राहुल गांधी का ह्रदय परिवर्तन हो गया? सवाल उठता है कि ये धार्मिकता सच्ची है या कुछेक दिनों के लिए दिखावा मात्र किया जा रहा है। कहीं ये धर्मनिरपेक्षता वैसी ही तो नही है जैसा कि सुनते आए है कि एक नगर वधु ही सबसे ज्यादा धर्म निरपेक्ष होती है।’

मालवीय ने आगे लिखा,’ चलो ये भी अच्छा हुआ कि तुम्हारी थोथी ही सही, ओढ़ी ही सही धर्मनिरपेक्षता के छींटे ही सही , मन्दिरों तक तो पहुंचे। अन्यथा अभी तक तो जालीदार टोपी धारण करके रोजा इफ्तारी ओर दरगाहों पर चादर चढ़ाने के उपक्रम तक ही धर्मनिरपेक्षता सिमटी हुई थी।’ इस पोस्ट में मालवीय ने राहुल गांधी के कुछ पुराने बयानो को क्वोट करते हुए कहा की आप ही कहते थे की लोग मंदिर में लड़कियाँ छेड़ने जाते है।

राहुल के गुजरात मंदिरो में जाने पर सवाल उठाते हुए मालवीय ने लिखा,’ अब बताइए कि जब आप मन्दिर- मन्दिर भटक रहे है तो आप पहले वाले बयान पर ही कायम हैं या उसका खंडन करते हैं ? बस, इसलिये पूछा कि आपने उस ओछी सोच के लिए कभी भी माफी मांगने की जेहमत नही उठाई। अब यही सत्य सामने आता है कि आपकी मानसिकता केवल गुजरात चुनाव के कारण बदली है। रामसेतु को काल्पनिक कहने वालों , हिन्दुओ को भगवा आतंकवादी कहने वालों , तुम्हारे पापों को, तुम्हारे पाखंड को जनता भलीभांति जानती है ।’